सिर्फ़ 0.30% ही ग्रीन है बिहार सरकार का ग्रीन बजट

बजट पेश करने के लिए जाते हुए बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी

नई दिल्ली: बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने 25 फ़रवरी 2020 को वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया। हरे रंग के कवर वाली बजट पुस्तिका से अपना भाषण पढ़ते हुए सुशील कुमार मोदी ने इसे देश का पहला ग्रीन बजट बताया।

वित्त मंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से की। “जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुक़ाबला करने के लिए 24,400 करोड़ रुपए के व्यय से ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ की शुरुआत करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है,” मोदी ने अपने बजट भाषण की शुरुआत करते हुए कहा।

सुशील कुमार मोदी, जो बिहार के उप मुख्यमंत्री भी हैं, ने बजट के दौरान जल-जीवन-हरियाली अभियान का ज़िक्र करते हुए बताया कि तालाब, पोखर, आहर, पाइन और कुओं की पहचान करके उन्हें अतिक्रमण से मुक़्त कराकर उनका जीर्णोद्धार (मरम्मत और सुधार) कराया जाएगा। कुओं और चपाकलों (ज़मीन से पानी निकालने वाला यंत्र) सोख्ता/रिचार्ज, जल संग्रहण क्षेत्रों में चेकडैम (छोटा बांध), सघन वृक्षारोपण, छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सौर ऊर्जा और टपकन सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) के लिए 3,515.51 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाएंगें। पिछले वित्त वर्ष में इसके लिए 2,492.47 करोड़ रुपए का प्रावधान था।

166,962 जल संचय संरचनाओं 116,000 कुओं, 28,013 पाइन, 18,840 आहर (पाइन और आहर बिहार में सिंचाई की प्राचीन प्रणाली है) की मरम्मत, नौ लाख कुओं और चपाकलों के पास सोख्ता निर्माण, 8,074 नदियों/नालों पर छोटे बांध बनाने, 1,813 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में नए जल स्रोतों के निर्माण, 30,711 सरकारी भवनों की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम शुरु हो चुका है, वित्त मंत्री ने सदन को बताया।

पुरानी योजना है जल-जीवन-हरियाली अभियान

वित्त मंत्री के यह सारे ऐलान जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत थे। लेकिन इसमें से एक भी योजना नई नहीं थी। इन सभी योजनाओं की घोषणा 2 अक्टूबर 2019 को गांधी जयंति के मौक़े पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी और उसी साल 26 अक्टूबर को इस जन-जीवन हरियाली योजना की शुरुआत एक अभियान रुप में ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही की थी। जल-जीवन-हरियाली अभियान के ऐलान और इसकी शुरुआत को मीडिया में भी प्रमुखता दी गई थी।

“वित्त मंत्री ने 24,000 करोड़ की जिस जल-जीवन-हरियाली योजना की बात की वो पिछले साल अक्टूबर की है, उसके अलावा तो इस बजट में ऐसा कुछ है नहीं जिससे इसे ग्रीन बजट कहा जा सके,” बिहार के जाने-माने पर्यावरणविद् इश्तियाक अहमद ने बताया।

इस बजट में बिहार के 12 ज़िलों में जैविक (ऑर्गेनिक) खेती के शुरु किए जाने का भी ज़िक्र किया। लेकिन यह योजना भी पुरानी है। वित्त वर्ष 2019-20 में इस योजना के लिए 155.88 करोड़ रुपए तीन साल में ख़र्च किए जाने का ऐलान किया गया था।

ऑर्गेनिक खेती की योजना 2017 से लागू है

“12 ज़िलों में ऑर्गेनिक खेती शुरु करने की योजना पुरानी है। यह योजना 2017 से चल रही है,” इश्तियाक अहमद ने बताया। “बजट से पहले जो प्रोसेस (प्रक्रिया) चल रहा था किसानों के साथ, उसमें इन्होंने कहा था कि 21,000 एकड़ में ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग की जाएगी। उसकी रिपोर्ट अख़बारों में भी छपी। उसका भी कहीं कोई ज़िक्र नहीं है बजट में,” इश्तियाक अहमद ने बताया।

खेती में सिंचाई की समस्या से निपटने के लिए बजट में जिस ‘खेत में ही जल संचय’ योजना का ज़िक्र किया वो भी पिछले साल शुरु की गई थी। वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में इस योजना के लिए 60 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में सौर ऊर्जा की बात कही लेकिन ऊर्जा विभाग के बजट में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

पर्यावरण विभाग को कुल बजट का 0.30% ही मिला

ग्रीन बजट नाम से तो लग रहा है कि यह बजट में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण पर केंद्रित रहा होगा। इंडियास्पेंड ने जब विभागवार बजट का विश्लेषण किया तो पाया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के लिए कुल 638.93 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं। यह कुल बजट राशि का आधा प्रतिशत (0.30%) भी नहीं है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के तहत बजट में हुई घोषणाओं में ज़्यादा ध्यान वृक्षारोपण और ईको-टूरिज़्म पर केंद्रित है। इस विभाग की घोषणाओं में महत्वपूर्ण घोषणा अनवरत परिवेशीय वायु गुणवत्ता प्रबोधन केंद्र (कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन) के बारे में है। बजट में ऐलान किया गया कि बिहार के अलग-अलग शहरों में 24 कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, इसके लिए 40.80 करोड़ रूपए ख़र्च किए जाने का प्रस्ताव है।

इसमें ग्रीन क्या है वो समझ नहीं आ रहा। मंशा तो बहुत अच्छी है क्योंकि जल-जीवन-हरियाली मिशन, ऑर्गेनिक कोरि़डोर और प्रदूषण के बारे में बजट में कहीं ना कहीं ज़िक्र तो हो रहा है लेकिन सवाल यह है कि वो एलोकेशन (आवंटन) में कहीं नहीं दिख रहा,” इश्तियाक अहमद कहते हैं।

हालांकि सरकार का कहना है कि महिला, बाल विकास और ग्रीन बजट विधानसभा के इसी सत्र में अलग से पेश किया जाएगा। लेकिन एक्सपर्ट्स का सवाल है कि जब ग्रीन बजट अलग से पेश होना ही है तो इसे ग्रीन बजट का नाम क्यों दिया गया। विधानसभा में अलग ग्रीन बजट पेश होने के बाद हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

(इसरार, इंडियास्पेंड हिंदी के संपादक हैं)

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। कृपया respond@indiaspend.org पर लिखें। हम भाषा और व्याकरण की शुद्धता के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

नई दिल्ली: बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने 25 फ़रवरी 2020 को वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया। हरे रंग के कवर वाली बजट पुस्तिका से अपना भाषण पढ़ते हुए सुशील कुमार मोदी ने इसे देश का पहला ग्रीन बजट बताया।

वित्त मंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से की। “जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुक़ाबला करने के लिए 24,400 करोड़ रुपए के व्यय से ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ की शुरुआत करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है,” मोदी ने अपने बजट भाषण की शुरुआत करते हुए कहा।

सुशील कुमार मोदी, जो बिहार के उप मुख्यमंत्री भी हैं, ने बजट के दौरान जल-जीवन-हरियाली अभियान का ज़िक्र करते हुए बताया कि तालाब, पोखर, आहर, पाइन और कुओं की पहचान करके उन्हें अतिक्रमण से मुक़्त कराकर उनका जीर्णोद्धार (मरम्मत और सुधार) कराया जाएगा। कुओं और चपाकलों (ज़मीन से पानी निकालने वाला यंत्र) सोख्ता/रिचार्ज, जल संग्रहण क्षेत्रों में चेकडैम (छोटा बांध), सघन वृक्षारोपण, छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सौर ऊर्जा और टपकन सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) के लिए 3,515.51 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाएंगें। पिछले वित्त वर्ष में इसके लिए 2,492.47 करोड़ रुपए का प्रावधान था।

166,962 जल संचय संरचनाओं 116,000 कुओं, 28,013 पाइन, 18,840 आहर (पाइन और आहर बिहार में सिंचाई की प्राचीन प्रणाली है) की मरम्मत, नौ लाख कुओं और चपाकलों के पास सोख्ता निर्माण, 8,074 नदियों/नालों पर छोटे बांध बनाने, 1,813 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में नए जल स्रोतों के निर्माण, 30,711 सरकारी भवनों की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम शुरु हो चुका है, वित्त मंत्री ने सदन को बताया।

पुरानी योजना है जल-जीवन-हरियाली अभियान

वित्त मंत्री के यह सारे ऐलान जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत थे। लेकिन इसमें से एक भी योजना नई नहीं थी। इन सभी योजनाओं की घोषणा 2 अक्टूबर 2019 को गांधी जयंति के मौक़े पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी और उसी साल 26 अक्टूबर को इस जन-जीवन हरियाली योजना की शुरुआत एक अभियान रुप में ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही की थी। जल-जीवन-हरियाली अभियान के ऐलान और इसकी शुरुआत को मीडिया में भी प्रमुखता दी गई थी।

“वित्त मंत्री ने 24,000 करोड़ की जिस जल-जीवन-हरियाली योजना की बात की वो पिछले साल अक्टूबर की है, उसके अलावा तो इस बजट में ऐसा कुछ है नहीं जिससे इसे ग्रीन बजट कहा जा सके,” बिहार के जाने-माने पर्यावरणविद् इश्तियाक अहमद ने बताया।

इस बजट में बिहार के 12 ज़िलों में जैविक (ऑर्गेनिक) खेती के शुरु किए जाने का भी ज़िक्र किया। लेकिन यह योजना भी पुरानी है। वित्त वर्ष 2019-20 में इस योजना के लिए 155.88 करोड़ रुपए तीन साल में ख़र्च किए जाने का ऐलान किया गया था।

ऑर्गेनिक खेती की योजना 2017 से लागू है

“12 ज़िलों में ऑर्गेनिक खेती शुरु करने की योजना पुरानी है। यह योजना 2017 से चल रही है,” इश्तियाक अहमद ने बताया। “बजट से पहले जो प्रोसेस (प्रक्रिया) चल रहा था किसानों के साथ, उसमें इन्होंने कहा था कि 21,000 एकड़ में ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग की जाएगी। उसकी रिपोर्ट अख़बारों में भी छपी। उसका भी कहीं कोई ज़िक्र नहीं है बजट में,” इश्तियाक अहमद ने बताया।

खेती में सिंचाई की समस्या से निपटने के लिए बजट में जिस ‘खेत में ही जल संचय’ योजना का ज़िक्र किया वो भी पिछले साल शुरु की गई थी। वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में इस योजना के लिए 60 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में सौर ऊर्जा की बात कही लेकिन ऊर्जा विभाग के बजट में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

पर्यावरण विभाग को कुल बजट का 0.30% ही मिला

ग्रीन बजट नाम से तो लग रहा है कि यह बजट में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण पर केंद्रित रहा होगा। इंडियास्पेंड ने जब विभागवार बजट का विश्लेषण किया तो पाया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के लिए कुल 638.93 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं। यह कुल बजट राशि का आधा प्रतिशत (0.30%) भी नहीं है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के तहत बजट में हुई घोषणाओं में ज़्यादा ध्यान वृक्षारोपण और ईको-टूरिज़्म पर केंद्रित है। इस विभाग की घोषणाओं में महत्वपूर्ण घोषणा अनवरत परिवेशीय वायु गुणवत्ता प्रबोधन केंद्र (कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन) के बारे में है। बजट में ऐलान किया गया कि बिहार के अलग-अलग शहरों में 24 कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, इसके लिए 40.80 करोड़ रूपए ख़र्च किए जाने का प्रस्ताव है।

इसमें ग्रीन क्या है वो समझ नहीं आ रहा। मंशा तो बहुत अच्छी है क्योंकि जल-जीवन-हरियाली मिशन, ऑर्गेनिक कोरि़डोर और प्रदूषण के बारे में बजट में कहीं ना कहीं ज़िक्र तो हो रहा है लेकिन सवाल यह है कि वो एलोकेशन (आवंटन) में कहीं नहीं दिख रहा,” इश्तियाक अहमद कहते हैं।

हालांकि सरकार का कहना है कि महिला, बाल विकास और ग्रीन बजट विधानसभा के इसी सत्र में अलग से पेश किया जाएगा। लेकिन एक्सपर्ट्स का सवाल है कि जब ग्रीन बजट अलग से पेश होना ही है तो इसे ग्रीन बजट का नाम क्यों दिया गया। विधानसभा में अलग ग्रीन बजट पेश होने के बाद हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

(इसरार, इंडियास्पेंड हिंदी के संपादक हैं)

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