भारत में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के लिए पिछड़े क्षेत्रों में बैंकों की आवश्यकता है, आधार कार्ड की नहीं…

  ( माना जाता है कि नकद हस्तांतरण में कोई परेशानी नहीं होती है, लेकिन गरीबों के लिए शायद ऐसा नहीं है: कई लोगों को दूर और भीड़ वाले बैंकों से नकदी निकालना मुश्किल लगता है, या बिचौलियों से निपटना पड़ता है, जो रिश्वत की मांग कर सकते हैं, या तकनीकी मुद्दों का सामना कर … Continued

“सीओपीडी भारत में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण, फिर भी इस संबंध में डॉक्टरों या मरीजों को नहीं है बहुत जानकारी !”

पुणे: 2017 में, हृदय रोग के बाद‘क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज’ (सीओपीडी)  भारत में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण था। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी, 2018 के अनुसार 2017 में लगभग 10 लाख (958,000) भारतीयों की मृत्यु इस रोग के कारण हुई है।   भारत में होने वाली कुल मौतों में से … Continued

छिपी हुई भूख से लड़ाई: “ हमारे मिशन में 90 फीसदी फसलें होनी चाहिए बायोफोर्टिफाइड ”

  बैंकॉक: 200 करोड़ लोग, या चार व्यक्तियों में से लगभग एक व्यक्ति,  छिपी हुई भूख या विटामिन और पोषक तत्वों की कमी से पीड़ित है, जिसके परिणामस्वरूप, मानसिक कमजोरी, खराब स्वास्थ्य, कम उत्पादकता और यहां तक ​​कि मृत्यु भी हो सकती है, जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बताया गया है।   बच्चे विशेष … Continued

“प्रवासन ग्रामीणों के लिए धन लाता है, लेकिन जाति संरचनाओं को कम नहीं करता है…”

  माउंट आबू: अलग-अलग जातियों में बड़े पैमाने पर पलायन ने कुंकरी में जीवन स्तर को ऊपर उठाया है। यह महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र का एक गांव है, जिसे कोंकण भी कहा जाता है। लेकिन प्रवासन के बाद धन में हुई वृद्धि ने गांव में जातिगत संरचनाओं को नहीं मिटाया है, जैसा कि ‘जर्नल ऑफ … Continued

“भारतीय महिलाओं के लिए कार्यबल से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त कारण कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह”

  (यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और सोसाइटी ऑफ वुमन इंजीनियर्स द्वारा 2018 के एक अध्ययन में पाया गया है कि भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों में कार्यरत पुरुष और महिला इंजीनियरों ने कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह के समान स्तर का सामना किया है। यह समझने के लिए कि पूर्वाग्रह व्यक्तियों और संगठनों दोनों को कैसे नुकसान पहुंचाता है, और … Continued ...

“स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझना आसान नहीं है…”

  न्यूयॉर्क: एक पोलिश शहर, कटोविस में ( जिसकी अर्थव्यवस्था हमेशा कोयले के उत्पादन पर टिकी हुई है )  दुनिया के नेताओं ने पिछले महीने बैठकर 2015 के पेरिस समझौते के साथ आगे बढ़ने की रूपरेखा पर काम किया, जिसका उद्देश्य, ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस तक नीचे रखना है।    वे नेता, जो … Continued