भारत की मायानगरी मुंबई नगर निगम के कुछ आवंटित धन के बयोरे अंधकार में

  ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) के आयुक्त द्वारा प्रस्तुत 2014-15 के बजट के विश्लेषण से ज्ञात होता है कि 75% से अधिक अर्जित या प्राप्त राजस्व  और 50% से अधिक कुल खर्च का ब्यौरा अस्पष्ट रहता है ।   मुंबई बजट  के अंतर्गत जो चार बजट शीर्ष  अर्थात् ए, बी, ई और जी शामिल … Continued

ब्लॉग: मुंबई में भगवान साध्य पर मकान असाध्य

  मैंने अक्सर घर खोजने वाले लोगों से सुना है कि  मुंबई में भगवान खोजना घर खोजने से आसान काम है   यह मज़ाक तब सत्य सिद्ध हो गया जब मैंने सोचा कि  अब समय आ गया है कि  मुझे मुंबई में मैंने अपना खुद का मकान खरीद लेना चाहिए। मैं वैसे भी पिछले आठ … Continued

ब्लॉग : बदलते दौर में संघर्ष रत बेस्ट बसें

  मुंबई की एक बस पर मेरी  पहली यादगार यात्रा उतनी ही आसान थी जितनी  123 की गिनती गिनना होता है । जब मैं छोटा बच्चा था तब मैं अक्सर अपने माता पिता के साथ इसी रूट नंबर की बस(बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात)  से यात्रा करता था । यह एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक … Continued

मुंबई सड़कें घातक नहीं -भारतीय मानकों के अनुसार

  2013 में  लगभग 18 लाख लोगों की आबादी  वाले ग्रेटर मुंबई में  23,500 से अधिक सड़क दुर्घटनाएँ  हुईं ।  जो किसी भी भारतीय शहर की तुलना में  सबसे ज्यादा  हैं ।   9705 के साथ चेन्नई और 7566 दुर्घटनाओं के साथ  दिल्ली मुंबई के पीछे हैं । लेकिन मुंबई की सड़कें इतनी भी घातक … Continued

ब्लॉग: “लोकल” में यात्रा करने से पूर्व 5 महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ

  अप्रैल 2013 में हिमालय के पहाड़ी शहर नैनीताल से मुंबई आने से पहले, मुझे अपने कार्यस्थल तक एक 30  मिनट का छोटा सा सर्द और आकर्षक पहाड़ी रास्ता  पैदल तय करना होता था। तो जब यहां मैं  10 किमी  दूर कार्यस्थल तक जाने  के लिए  के लिए मुंबई की लोकल ट्रेन द्वारा 20 मिनट … Continued

दुनिया में मुंबईकर सर्वाधिक जमीन तंगी से बेहाल

(दक्षिण मुंबई के हैंगिंग गार्डन का एक दृश्य)   मुंबई में किसी भी खुले क्षेत्र में जाने पर ही ज्ञात होता है कि  यहां के स्थानीय लोगोंकी  , जिन्हें  मुंबईकर भी कहा जाता है,  उनकी वास्तव में खुली जगह की कितनी लालसा है । हर खेल का मैदान, हर उद्यान विहार और हर पार्क पूरी … Continued

क्यों मुंबई की विफलता भारत की विफलता है

  दिल्ली में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद से ‘बड़े आर्थिक सुधारों ‘ का बिगुल बार बार दोहराया जाता रहा है। यह निर्विवादित विषय है कि  भारत में कई तरह से विभागों और मंत्रालयों में सुधार की जरूरत है, लेकिन किस तरह के सुधार , देश के ढहते शहरों के आर्थिक विकास … Continued