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वर्ष 2015-16 में, इंटरनेट शटडाउन यानि इंटरनेट बैन से भारत को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। यदि आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2015-16 में भारत को 968 मिलियन डॉलर यानी 6,485 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। बता दें कि यह जानकारी ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की एक रिपोर्ट में सामने आई है। 19 देशों में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर इस रिपोर्ट में बताया गया है कि एक साल में भारत में 22 बार इंटरनेट बैन किया गया है। बता दें कि एक साल में इंटरनेट बैंन होने के आंकड़े इराक में इंटरनेट बैन के आंकड़ों के बराबर है। इस रिपोर्ट में इंटरनेट बैन होने से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव के संकेत दिए गए हैं।

भारत में इंटरनेट सेवाओं को अशांति रोकने के उदेश्य से बंद किया जाता रहा है। कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया है, क्योंकि राज्य में अभी भी माहौल अशांत है। इससे राज्य की सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र अपंग हो गया है। इससे वहां नौकरी में कटौती हुई है और कई कंपनियां अपने काम-काज को राज्य के बाहर से संचालित करते हैं।

ब्रूकिंग्स अध्ययन में 1 जुलाई, 2015 और 30 जून, 2016 के बीच 19 देशों में 81 अल्पकालिक इंटरनेट शटडाउन का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट कहती है कि इन शटडाउन से वैश्विक अर्थव्यवस्था में कम से कम 2.4 बिलियन डॉलर यानी 16,080 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।इसमें सबसे अधिक नुकसान भारत को हुआ है। भारत के लिए नुकसान के आंकड़े 968 मिलियन डॉलर है। 465 मिलियन डॉलर के साथ सऊदी अरब दूसरे नंबर पर और 320 मिलियन डॉलर के साथ मोरक्को तीसरे स्थान पर है।

वैश्विक स्तर पर 19 देशों में शटडाउन 753 दिनों तक चला। 348 दिनों के साथ सीरिया (इस्लामी राज्य द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में) में सबसे अधिक दिनों का बंद रहा है। 182 दिनों के बंद के साथ मोरक्को दूसरे स्थान पर और 70 दिनों के आंकड़े के साथ भारत तीसरे स्थान पर है।

2015-16 में, इंटरनेट शटडाउन से भारत पर 968 मिलियन डॉलर का बोझ

भारत में इंटरनेट बैन के आंकड़े इराक के बराबर

सर्वेक्षण में लिए गए दिनों के दौरान 19 देशों में कुल 81 मौकों पर इंटरनेट बैन करने के मामले सामने आए हैं। भारत 22 बार इंटरनेट को शटडाउन किया गया है, जो कि सर्वाधिक है। बता दें कि यह संख्या इराक में इंटरनेट बंद होने के बराबर है। दूसरे स्थान पर सीरिया है। सीरिया में आठ बार इंटरनेट बैन किया गया है। जबकि छह की संख्या के साथ पाकिस्तान तीसरे स्थान पर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में, भारत का नाम युगांडा, अल्जीरिया और इराक जैसे देशों की सूची में शामिल हुआ है। वहां परीक्षा में छात्रों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी की चिंता की वजह से इंटरनेट सेवाएं बंद की जाती हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2016 में गुजरात सरकार ने राजस्व लेखाकार भर्ती परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के दुरुपयोग को रोकने के लिए चार घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया था।

सरकार की अधिसूचना का हवाला देते हुए रिपोर्ट कहती है कि, “लेखाकार की भर्ती के लिए परीक्षा की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए, परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के दुरुपयोग को रोकने के लिए इंटरनेट सेवा एजेंसियों को 9 बजे से 1 बजे तक सभी इंटरनेट आधारित सामाजिक मीडिया सेवाओं को बंद करने के लिए कहा गया।”

विश्व भर में इंटरनेट बैन, 2015-16

Source: Brookings Institution

राष्ट्रीय इंटरनेट सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित

ब्रूकिंग्स रिपोर्ट में इंटरनेट शटडाउन को छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है-राष्ट्रीय इंटरनेट, उप-राष्ट्रीय इंटरनेट, राष्ट्रीय मोबाइल इंटरनेट, उप-राष्ट्रीय मोबाइल इंटरनेट, राष्ट्रीय एप्लिकेशन / सेवा, और उप-राष्ट्रीय एप्लिकेशन / सेवा (वीओआईपी -वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल सहित)।

सबसे अधिक शटडाउन राष्ट्रीय इंटरनेट की श्रेणी में हुए हैं। इस श्रेणी में 36 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया है। इस संबंध में उप-राष्ट्रीय मोबाइल इंटरनेट श्रेणी में 22 और राष्ट्रीय एप्लिकेशन / सेवा में 14 बार शटडाउन हुए हैं।

इंटरनेट के प्रकार के अनुसार शटडाउन, वर्ष 2015-16

Source: Brookings Institution

ब्रूकिंग्स के आंकड़ों को कमतर आंका गया है !

ब्रूकिंग्स द्वारा किए गए अनुमान वास्तविकता से कम आंके गए हो सकते हैं। महा गुजरात बैंक कर्मचारी संघ (MGBEA) के महासचिव के. वी बारोट के अनुसार, सितंबर 2015 में छह दिनों के लिए इंटरनेट बंद होने से केवल गुजरात के बैंकों में 7,000 करोड़ रुपए के नुकसान का सामना करना पड़ा था। बारोट के इस आंकड़े को सितंबर 2015 में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में उद्धृत किया गया है।

वर्ष 2015 से, कम से कम 11 भारतीय राज्यों ने 37 बार इंटरनेट बंद किया है। गौर हो कि इनमें से 22 बार वर्ष 2016 के पहले नौ महीनों के दौरान किया गया। यह जानकारी दिल्ली के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर कम्यूनिकेशन गर्वनेंस’ द्वारा संकलित किए गए आंकड़ों में सामने आई है। इससे लगता है कि ब्रूकिंग्स रिपोर्ट में सभी बंद को शामिल नहीं किया गया है।

ब्रूकिंग्स रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक नुकसान और अधिक हो सकता है, क्योंकि उनका विश्लेषण केवल सकल घरेलू उत्पाद पर आर्थिक प्रभाव की दृष्टि से किया गया है। इसमें अवरुद्ध डिजिटल उपयोग के साथ जुड़े डूबे हुए राजस्व के अनुमान, कर्मचारियों की उत्पादकता पर प्रभाव, व्यापार के विस्तार के लिए बाधाएं, या ऐसे अवरोधों से उत्पन्न कारोबारी विश्वास के नुकसान को शामिल नहीं किया गया है।

अन्य विकासशील देशों पर इंटरनेट शटडाउन का कम प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार विकसित अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्षति विकासशील देशों की तुलना में अधिक होगी। उदाहरण के लिए, वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद 18,438 ट्रिलियन डॉलर (1,235 करोड़ लाख रुपये) है, जिसमें से 6 फीसदी इंटरनेट क्षेत्र से प्राप्त होता है। अगर एक सप्ताह के लिए राष्ट्रीय इंटरनेट बंद किया जाता तो इससे कम से कम 54.1 बिलियन डॉलर (3.62 करोड़ लाख रुपए) आर्थिक नुकसान होगा। यदि यह बंद एक साल तक चलता है तो आर्थिक नुकसान कम से कम 2.8 ट्रिलियन डॉलर (187.6 लाख करोड़ रुपए) होगा।

यदि सभी भारतीय ऑनलाइन होते हैं तो 2020 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 1 ट्रिलियन डॉलर यानि 67 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि होगी। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने मई 2016 में विस्तार से बताया है।

ब्रूकिंग्स रिपोर्ट ने भविष्य में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने से नुकसान में वृद्धि होने के संबंध में चेतावनी दी है।

रिपोर्ट कहती है, “डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ देशों में इंटरनेट बैन करने का बोझ और बढ़ेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय साझे सहमति के बिना इंटरनेट बैन पर फैसला लेते हैं तो निश्चित रूप से वैश्विक आर्थिक विकास कमजोर होगा।”

(साहा एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। वह ससेक्स विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज़ संकाय से वर्ष 2016-17 के लिए जेंडर एवं डिवलपमेंट के लिए एमए के अभ्यर्थी हैं।

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 26 अक्तूबर 2016 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

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