वर्ष 2024 में हीट वेव ने 48 हजार लोगों को अस्‍पताल पहुंचाया, क्‍या ये साल और भयावह होगा?

पिछले साल भारत में भीषण गर्मी पड़ी थी। लू ने स्‍थ‍ित‍ि को और ब‍िगाड़ा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में 48 हजार से ज्यादा लोग हीट स्ट्रोक की चपेट में आकर अस्पताल पहुंचे। 269 की उपचार के दौरान मौत हुई। महंगाई की मार भी पड़ी। क्‍या ये साल और बदतर होने जा रहा है?;

Update: 2025-04-04 00:30 GMT

लखनऊ। इस साल भीषण गर्मी पड़ सकती है। भारत में अप्रैल से जून तक सामान्य से ज्‍यादा गर्मी पड़ने की संभावना है तो है ही, इसके अलावा मध्य, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में लू (हीट वेव) के दिनों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि इस साल शुरुआत से ही गर्मी रिकॉर्ड बना रही है, ऐसे में आने वाला समय और चिंताजनक हो सकता है।

भारतीय मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने वर्चुअल प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान बताया, “भारत में आमतौर पर अप्रैल और जून के बीच चार से सात दिन तक लू चलती है। लेकिन इस साल सर्दी के महीने में ही कई राज्‍यों में लू चली। इस साल कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी पड़ सकती है।”

“राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक और तमिलनाडु के उत्तरी भागों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है।

महापात्रा ने कहा, "पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित कुछ राज्यों में इस अवधि के दौरान 10 से 11 दिन तक लू चल सकती है।"

भारतीय मौसम विभाग ने अपनी एक व‍िज्ञप्‍ति
में बताया कि अप्रैल में भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान बढ़ने की संभावना है, दक्षिण और उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्सों को छोड़कर जहां स्थितियां सामान्य के करीब रह सकती हैं। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व में कुछ इलाकों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी औसत से अधिक रहने की उम्मीद है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD)

आईएमडी ने सोमवार को कहा कि अप्रैल का महीना बेहद गर्म रहने की उम्मीद है, जिसमें ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में पांच से छह दिन लू चलने की संभावना है, जबकि दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य हिस्सों में दो से तीन दिन लू चल सकती है।

वर्चुअल प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान जानकारी दी गई कि भारत के लिए साल 2024 सबसे ज्यादा गर्म सालों में से एक था। बीते साल देश में 554 दिन हीटवेव का असर रहा। 554 हीटवेव डे से मतलब देश में हीटवेव की कुल घटनाओं से है। हीटवेव दिनों की गणना कैलेंडर के दिनों से नहीं होती बल्कि लू चलने की घटनाओं की गिनती से होती है।

वर्ष 2025 में हीटवेव पहले ही शुरू हो गई। 2024 में ओडिशा में पहली हीटवेव 5 अप्रैल को देखी गई। लेकिन 2025 में कोंकण और तटीय कर्नाटक में 27-28 फरवरी को हीटवेव की स्थिति दर्ज की गई।

इस बीच आईएमडी को अप्रैल में सामान्य वर्षा की उम्मीद है - 39.2 मिमी के दीर्घकालिक औसत के 88 से 112 प्रतिशत के बीच। उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पश्चिम-मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। हालांकि आईएमडी ने केरल और कर्नाटक के पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में भूस्खलन और पूर्वोत्तर राज्यों में संभावित बाढ़ का खतरा जताया है।

"उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर के कुछ स्थानों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जहां तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा कम हो सकता है।" महापात्रा ने कहते हैं।

सर्दी में लू, रात का तापमान बढ़ा

इस साल देश में फरवरी में ही गर्म हवाएं चलने लगीं। 25 फरवरी 2025 को गोवा और महाराष्ट्र में भारत में साल की पहली हीटवेव दर्ज की गई। आईएमडी ने फरवरी 2025 को पिछले 125 सालों में सबसे गर्म बता चुका है।

हीट वेव की परिभाषा, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 40°C या उससे अधिक, तटीय क्षेत्रों में 37°C या उससे अधिक और पहाड़ी क्षेत्रों में 30°C या उससे अधिक होना चाहिए।

वर्ष 2025 के शुरुआती दो महीने, जनवरी, फरवरी तीन सबसे गर्म महीनों में शामिल हैं, क्योंकि जनवरी 1901 के बाद से तीसरा सबसे गर्म महीना था। इससे पहले 1901 के रिकॉर्ड में 2024 को सबसे गर्म वर्ष घोषित किया गया था।

15 मार्च, 2025 को ओडिशा के बौध में भारत में सबसे ज्‍यादा तापमान दर्ज किया गया। भीषण गर्मी जारी रही और 16 मार्च को बौध में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान पहुंचा। उसके बाद झारसुगुड़ा (42 डिग्री सेल्सियस) और बोलनगीर (41.7 डिग्री सेल्सियस) का स्थान रहा। इस तरह उस दिन ओडिशा देश के तीन सबसे गर्म स्थान थे।

वर्ष 2024 में पहली बार आईएमडी ने अपनी प्रेस विज्ञप्तियों में गर्म रात और अत्यधिक गर्म रात की स्थिति वाले दिनों के आंकड़े जारी करना शुरू क‍िये। अब 2025 में पहली बार आईएमडी ने फरवरी के महीने में अपनी प्रेस विज्ञप्ति में ‘सामान्य से अधिक रात के तापमान’ के आंकड़े शामिल किए ज‍िससे पता चला कि रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है।

11 से 19 फरवरी 2025 के बीच 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कम से कम एक बार रात का तापमान सामान्य से कम से कम 1°C अधिक दर्ज किया। इनमें से 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने रात का तापमान सामान्य से 3°C से 5°C अधिक दर्ज किया।

ओडिशा समेत दस राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में रात का तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। ओडिशा में दो दिन 12 और 20 फरवरी 2025 को रात का तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

आईएमडी के अनुसार राजस्थान और हिमालयी राज्य जम्मू-कश्मीर समेत उत्तर-पश्चिम के दो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में रात का तापमान सामान्य से काफी अधिक (5.1 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक) दर्ज किया गया।

15 मार्च को ओडिशा और झारखंड में वर्ष की पहली गर्म रात दर्ज की गई जो 2024 की तुलना में काफी पहले है। तब जब गुजरात और महाराष्ट्र ने 27 मार्च को अपनी पहली गर्म रातें देखी थीं। 2024 में ओडिशा और झारखंड में उनकी पहली गर्म रातें बहुत बाद में क्रमशः 5 अप्रैल और 29 मई थी।

फरवरी की 27 तारीख को ठंडी के ह‍िसाब से सबसे ज्‍यादा गर्मी रही। न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था जो 1950 के बाद से 74 वर्षों
में इस महीने का सबसे अधिक तापमान था। इस बीच औसत अधिकतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस रहा जो पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक था। इसकी तुलना में फरवरी 2023 में औसत तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस रहा जो 17 वर्षों में सबसे अधिक था।

भारतीय मौसम विभाग (IMD)

भारतीय मौसम विभाग में वर‍िष्‍ठ वैज्ञानिक सोमा सेन रॉय बताती हैं कि उत्‍तर-पश्‍च‍िम और मध्‍य भारत में हीटवेव द‍िनों की संख्‍या दोगुनी से भी ज्‍यादा हो सकती है। हालांकि ये भव‍िष्‍यवाणी ही है। जरूरी नहीं है क‍ि ये सच ही हो। लेकिन प‍िछले र‍िकॉर्ड को देखकर मामला अनुमान से भी ज्‍यादा हो सकता है। ऐसा भी नहीं होने वाला है कि हर द‍िन का तापमान सामान्‍य से ज्‍यादा ही होगा।

भारत मौसम विज्ञान विभाग लखनऊ के प्रभारी निदेशक जेपी गुप्‍ता के अनुसार यह असामान्य गर्मी ज्यादातर साफ आसमान और कम बारिश के कारण थी। "फरवरी ज्यादातर शुष्क और गर्म रही, क्योंकि हवाएं बदलती रहीं और कुछ पश्चिमी विक्षोभों के बावजूद बारिश बहुत अधिक नहीं हुई। आसमान ज्यादातर साफ रहा।" वे आगे बताते हैं।

गर्मी बढ़ेगी, लू चलेगी, तो इसका असर क्‍या पड़ेगा?

भारत में 2022 और 2023 की तुलना में 2024 में अधिक खराब मौसम रहा। ऐसे द‍िनों की संख्‍या पहले नौ महीनों में 255 दिन रही। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2025 रिपोर्ट के अनुसार इससे 3.2 मिलियन हेक्टेयर फसल भूमि प्रभावित हुई जो 2022 की तुलना में 74 प्रतिशत अधिक है।

दिल्ली में फरवरी भी सामान्य से अधिक गर्म रही, जिसमें दिन का तापमान अधिक और रातें गर्म रहीं। औसत न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो 2017 के बाद से सबसे अधिक है। इस वर्ष का मासिक न्यूनतम औसत 10.6 डिग्री सेल्सियस के दीर्घकालिक औसत से 1 डिग्री सेल्सियस अधिक था। फरवरी का मासिक अधिकतम औसत 26.7 डिग्री सेल्सियस रहा जो दीर्घकालिक औसत से 2.5 डिग्री सेल्सियस अधिक है।

आईएमडी ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा है, "मार्च से मई 2025 के मौसम के दौरान पूर्वोत्तर भारत, सुदूर उत्तर भारत और प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी वाले दिन होने की संभावना है।"

मध्‍य प्रदेश, उज्‍जैन कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख प्रवीण कुमार द्विवेदी कहते हैं क‍ि यदि मार्च-अप्रैल में अगर तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंचता है तो गेहूं के उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। अभी औसत तापमान 28 डिग्री सेल्सियस है, जबकि गेहूं के लिए आदर्श तापमान 20-22 डिग्री सेल्सियस माना जाता है। अधिक गर्मी के कारण गेहूं के दाने सिकुड़ सकते हैं, जिससे पैदावार में कमी आ सकती है।

"इसके अलावा सब्जियों, दालों और गन्ने की फसल पर भी तापमान बढ़ने का बुरा असर पड़ा सकता है। अगर ज्यादा गर्मी की वजह से मवेशियों के लिए चारा उत्पादन प्रभावित होता है, तो दूध का उत्पादन भी घट सकता है।" वे आगे बताते हैं।

करनाल स्थित भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान के प्रधान कृष‍ि वैज्ञानिक अनुज कुमार (Quality and Basic Science) बताते हैं “25 नवबंर से पहले बोई गई फसल मार्च के महीने में तैयार हो जाती है, जबकि 25 नवंबर के बाद बोई गई फसल अप्रैल तक पक जाती है। आखिरी के एक महीने में गेहूं की बालियों में दूध भरने लगता है। इस समय सही तापमान की जरूरत पड़ती है। ज्‍यादा तापमान के कारण बालियां जल्दी पक जाती हैं ज‍िसकी वजह से दाने पतले हो जाते हैं। ऐसे में दानों की संख्‍या तो ठीक रहेगी। लेकिन वजन कम हो जायेगा।”

अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) की कार्यकारी समूह की छठी आकलन रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि भारत पहले से ही घातक हीटवेव, बादल फटने, तूफान और सूखे जैसी स्थितियों का सामना कर रहा है और जलवायु संकट के साथ ये घटनाएं और भी तीव्र होने वाली हैं।

नई दिल्ली ​स्थित जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCCHH) की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पूर्वी पटेल ने रिपोर्ट में बताया कि साल 2024 में भीषण गर्मी और लू चलने की अव​धि 77 दिन दर्ज की गई जिससे मार्च से लेकर जून माह के बीच देश के 17 राज्यों ने गर्म रातों का अनुभव किया। उत्तरी भारत के चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश ने बेमौसम रात के तापमान में काफी वृद्धि महसूस की। चंडीगढ़, दिल्ली और हरियाणा ने 15 से लेकर 18 जून तक लगातार चार "गंभीर गर्म रात" का सामना किया। सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक अहम जो​खिम है जो एक नई चरम सीमा को दर्शा रहा है क्योंकि इन क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य स्तर तक गिरने में विफल रहा।

"व्यक्तिगत स्तर पर स्वास्थ्य के प्रभावों को जानने के लिए 2024 में छह राज्यों को स्टडी के लिए चुना गया जहां से प्रभावित मरीजों की जानकारी राष्ट्रीय गर्मी से संबंधित बीमारी और मृत्यु निगरानी के डिजिटल प्लेटफॉर्म आईएचआईपी पोर्टल पर प्राप्त हो रही थी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और प​श्चिम बंगाल को इसके लिए चुना गया। यह अभी तक की पहली रियल टाइम डाटा आधारित स्टडी है जो एक मार्च 2024 से 31 जुलाई 2024 के बीच भर्ती मरीजों पर केंद्रित रही। हमने यह भी पाया कि भीषण गर्मी की सर्वा​धिक चपेट में आने वाले पुरुष रोगियों की औसत आयु 40±20 वर्ष रही जबकि महिलाओं के मामले में हमें कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं देखने को मिला।" डॉ. पूर्वी आगे कहती हैं।

उन्होंने कहा, “हम भीषण गर्मी या हीट वेव के प्रभावों के बारे में जानते हैं। शिशुओं, बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, विकलांग लोगों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर इसके परिणाम गंभीर हैं। स्वास्थ्य को लेकर भी कई तरह के प्रभावों की जानकारी सामने है। लेकिन भारत में व्यवसायिक तौर पर पीड़ितों के बारे में बहुत सीमित डाटा उपलब्ध है।”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि 2024 में 48 हजार से ज्यादा लोग हीट स्ट्रोक की चपेट में आकर अस्पताल पहुंचे। इसके मुताबिक कुल 48,156 संदिग्ध हीट स्ट्रोक मामलों में 269 की उपचार के दौरान मौत हुई। इन्हें संदिग्ध हीटस्ट्रोक मौत (एसएचडी) की श्रेणी में रखा गया जबकि 161 लोगों की हीट स्ट्रोक की वजह से मौत होने की पुष्टि है। अगर 01 मार्च 2023 से 25 जुलाई 2024 के बीच ​स्थिति देखें तो इन दो वर्ष में देश के 36 राज्यों में कुल 67,637 लोग गर्मी की चपेट में आकर अस्पताल पहुंचे जिनमें से 374 लोगों की उपचार के दौरान मौत हुई।

खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं महंगी?

फाइनेंस एंड इकोनॉमिक्स थिंक काउंसिल के संस्थापक और अध्यक्ष विक्रांत निर्मला सिंह कहते हैं क‍ि ज्‍यादा गर्मी और हीट वेव का सीधा मतलब है कि आम लोगों की थाली महंगी होगी। "अगर मई में हीट वेव द‍िनों की संख्‍या सामान्‍य से ज्‍यादा होगी तो महंगाई दर बढ़ेगी। खाने की वस्‍तुएं आम लोगों की पहुंच से दूर होंगी। महंगाई 20 से 40 बेसिस प्‍वाइंट बढ़ सकती है।"


महंगाई का सबसे ज्‍यादा असर सब्‍ज‍ियों की कीमत पर द‍िखेगी। 20-25 रुपए प्रति क‍िलो वाली सब्‍जी की कीमत प‍िछले साल की तुलना में 40 से 60 फीसदी तक बढ़ सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय पर भी इसका असर देखने को म‍िल सकता है। आने वाले समय में अगर मौसम व‍िभाग का अनुमान सही हुआ तो कंज्‍यूमर इंफ्लेशन में बढ़ोतरी हो सकती है।


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