अब तक सबसे ज्यादा महिला सांसद 17वीं लोकसभा में चुनी गईं

मुंबई: इंडियास्पेंड के विश्लेषण के अनुसार, 17 वीं लोकसभा में महिला संसद सदस्यों की संख्या अब तक सबसे ज्यादा – 78 है। 716 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और 11 फीसदी की सफलता दर रही है।

उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक महिला सांसद चुनी गई हैं, प्रत्येक राज्य ने 11 महिला सांसदों को चुना है। इसके बाद महाराष्ट्र (8), ओडिशा (7) और गुजरात (6) का स्थान रहा है।

राजनीतिक दलों में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में सबसे अधिक महिला विजेता (41), या लोकसभा में चुने गए अपने सभी सदस्यों (303) में से लगभग 14 फीसदी महिलाएं हैं। भाजपा के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (9) है, जिसने 41 फीसदी महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में किसी भी चुनाव के लिए अभूतपूर्व थी, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 7 मार्च, 2019 की रिपोर्ट में बताया था।

इन दलों के बाद कांग्रेस है, इसके 52 सांसदों में से 7 यानी 13.5 फीसदी, युवजन श्रमिका रायथू कांग्रेस के 22 में से 4 यानी 18 फीसदी और और बीजू जनता दल के 12 में से 4 यानी 33.3 फीसदी महिला उम्मीदवार हैं।

अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

इससे पहले सबसे अधिक महिला सांसदों की संख्या पिछले लोकसभा चुनाव में थी - 2014 में 62 महिलाएं चुनी गई थी और लोकसभा में उनकी हिस्सेदारी 11.4 फीसदी थी।

1977 की छठी लोकसभा में सबसे कम महिला सांसदों की संख्या थी- 19 यानी 3.5 फीसदी थीं।

Source: Press Information Bureau; *Election Commission of India, PRS Legislative Research

महिला उम्मीदवारों के लिए सबसे कम सफलता दर 1996 में 11 वीं लोकसभा में थी, जब 6.7 फीसदी या 599 में से 40, महिला उम्मीदवार चुनी गई थी। 1957 में दूसरी लोकसभा में महिला उम्मीदवारों की सफलता दर सबसे ज्यादा थी - 48.9 फीसदी या 45 में से 22।

अपने राष्ट्रीय संसदों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के प्रतिशत के आधार पर 193 देशों की 2019 की सूची में, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को पीछे छोड़ते हुए, 2018 के बाद से 3 स्थान नीचे आते हुए भारत 149 वें स्थान पर रहा है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 15 मार्च, 2019 की रिपोर्ट में बताया है।

लोकसभा में 66 महिला सांसद थीं, जिन्होंने 524 सीटों में से 12.6 फीसदी पर कब्जा कर लिया था, जबकि 1 जनवरी, 2019 को विश्व औसत 24.3 फीसदी था।

17 वीं लोकसभा में महिला सांसदों के प्रतिनिधित्व (सभा की कुल ताकत के संदर्भ में ) में 2014 में 11 फीसदी से 2019 में 14 फीसदी तक सुधार देखा गया है। यह रवांडा (61 फीसदी), दक्षिण अफ्रीका (43 फीसदी), यूनाइटेड किंगडम (32 फीसदी), यूएसए (24 फीसदी) और बांग्लादेश (21 फीसदी) जैसे देशों की तुलना में यह अभी भी कम है।

निर्वाचित महिला उम्मीदवार- जो खबरों में रहीं

​​अमेठी से भाजपा की उम्मीदवार और 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में केंद्रीय कपड़ा मंत्री, स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ 55,120 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है।

भोपाल से चुनाव लड़ रही भाजपा की साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह को हराकर 364,822 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। ठाकुर पर 2008 के मालेगांव विस्फोटों में शामिल होने का आरोप है।

पश्चिम बंगाल के हुगली से जीतने वाले भाजपा के लॉकेट चटर्जी ने चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे में बताया कि वह 14 आपराधिक मामलों का सामना कर रही थी। चटर्जी ने 73,362 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

भाजपा की हेमा मालिनी, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मथुरा से 293,471 मतों के अंतर से जीत हासिल की है, उन्होंने 250 करोड़ रुपये की संपत्ति की सूचना दी है, जो महिला उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा है, जैसा कि ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के एक विश्लेषण में कहा गया है। उसके बाद पंजाब के शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल के पास 2019 में 217 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। उन्होंने भठिंडा निर्वाचन क्षेत्र से 21,772 मतों के अंतर से जीतीं।

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 24 मई, 2019 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। कृपया respond@indiaspend.orgर लिखें। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

मुंबई: इंडियास्पेंड के विश्लेषण के अनुसार, 17 वीं लोकसभा में महिला संसद सदस्यों की संख्या अब तक सबसे ज्यादा – 78 है। 716 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और 11 फीसदी की सफलता दर रही है।

उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक महिला सांसद चुनी गई हैं, प्रत्येक राज्य ने 11 महिला सांसदों को चुना है। इसके बाद महाराष्ट्र (8), ओडिशा (7) और गुजरात (6) का स्थान रहा है।

राजनीतिक दलों में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में सबसे अधिक महिला विजेता (41), या लोकसभा में चुने गए अपने सभी सदस्यों (303) में से लगभग 14 फीसदी महिलाएं हैं। भाजपा के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (9) है, जिसने 41 फीसदी महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में किसी भी चुनाव के लिए अभूतपूर्व थी, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 7 मार्च, 2019 की रिपोर्ट में बताया था।

इन दलों के बाद कांग्रेस है, इसके 52 सांसदों में से 7 यानी 13.5 फीसदी, युवजन श्रमिका रायथू कांग्रेस के 22 में से 4 यानी 18 फीसदी और और बीजू जनता दल के 12 में से 4 यानी 33.3 फीसदी महिला उम्मीदवार हैं।

अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

इससे पहले सबसे अधिक महिला सांसदों की संख्या पिछले लोकसभा चुनाव में थी - 2014 में 62 महिलाएं चुनी गई थी और लोकसभा में उनकी हिस्सेदारी 11.4 फीसदी थी।

1977 की छठी लोकसभा में सबसे कम महिला सांसदों की संख्या थी- 19 यानी 3.5 फीसदी थीं।

Source: Press Information Bureau; *Election Commission of India, PRS Legislative Research

महिला उम्मीदवारों के लिए सबसे कम सफलता दर 1996 में 11 वीं लोकसभा में थी, जब 6.7 फीसदी या 599 में से 40, महिला उम्मीदवार चुनी गई थी। 1957 में दूसरी लोकसभा में महिला उम्मीदवारों की सफलता दर सबसे ज्यादा थी - 48.9 फीसदी या 45 में से 22।

अपने राष्ट्रीय संसदों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के प्रतिशत के आधार पर 193 देशों की 2019 की सूची में, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को पीछे छोड़ते हुए, 2018 के बाद से 3 स्थान नीचे आते हुए भारत 149 वें स्थान पर रहा है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 15 मार्च, 2019 की रिपोर्ट में बताया है।

लोकसभा में 66 महिला सांसद थीं, जिन्होंने 524 सीटों में से 12.6 फीसदी पर कब्जा कर लिया था, जबकि 1 जनवरी, 2019 को विश्व औसत 24.3 फीसदी था।

17 वीं लोकसभा में महिला सांसदों के प्रतिनिधित्व (सभा की कुल ताकत के संदर्भ में ) में 2014 में 11 फीसदी से 2019 में 14 फीसदी तक सुधार देखा गया है। यह रवांडा (61 फीसदी), दक्षिण अफ्रीका (43 फीसदी), यूनाइटेड किंगडम (32 फीसदी), यूएसए (24 फीसदी) और बांग्लादेश (21 फीसदी) जैसे देशों की तुलना में यह अभी भी कम है।

निर्वाचित महिला उम्मीदवार- जो खबरों में रहीं

​​अमेठी से भाजपा की उम्मीदवार और 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में केंद्रीय कपड़ा मंत्री, स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ 55,120 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है।

भोपाल से चुनाव लड़ रही भाजपा की साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह को हराकर 364,822 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। ठाकुर पर 2008 के मालेगांव विस्फोटों में शामिल होने का आरोप है।

पश्चिम बंगाल के हुगली से जीतने वाले भाजपा के लॉकेट चटर्जी ने चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे में बताया कि वह 14 आपराधिक मामलों का सामना कर रही थी। चटर्जी ने 73,362 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

भाजपा की हेमा मालिनी, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मथुरा से 293,471 मतों के अंतर से जीत हासिल की है, उन्होंने 250 करोड़ रुपये की संपत्ति की सूचना दी है, जो महिला उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा है, जैसा कि ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के एक विश्लेषण में कहा गया है। उसके बाद पंजाब के शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल के पास 2019 में 217 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। उन्होंने भठिंडा निर्वाचन क्षेत्र से 21,772 मतों के अंतर से जीतीं।

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 24 मई, 2019 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

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