कोरोनावायरस आर्थिक पैकेजः वर्तमान योजनाओं का नया रूप, नया ख़र्च कम

मुंबई/जयपुरः देश में कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन में निर्धन लोगों को राहत देने के लिए आर्थिक पैकेज घोषित किया गया है। लेकिन इस पैकेज में चुनौती के स्तर का अनुमान कम लगाया गया है और यह राहत पर्याप्त नहीं होगी, विशेषज्ञों की राय और इंडियास्पेंड की ओर से सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार।

वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च, 2020 को कहा था कि उसने प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत, 1.7 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की योजना बनाई है। इसमें अतिरिक्त अनाज का वितरण, महिलाओं, किसानों और निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों को सीधे नकद लाभ, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बीमा और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए लाभ शामिल थे। इनमें से बहुत से लाभ फ़ंडिंग में वास्तविक वृद्धि नहीं हैं, जबकि कुछ वर्तमान योजनाओं से ही जुड़े हैं, जैसा कि हमारे विश्लेषण से पता चला है।

हालांकि अधिक अनाज और नकद लाभों से निर्धन तबक़े को मदद मिलेगी, लेकिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत भुगतान में वृद्धि जैसे कुछ लाभ वास्तव में कोई लाभ नहीं हैं -- राज्य सरकारें पहले ही केंद्र सरकार की ओर से घोषित “वृद्धि” से अधिक भुगतान दे रही हैं। कुछ अन्य घोषणाएं, जैसे कर्मचारियों को उनके प्रॉविडेंट फ़ंड (पीएफ़) का 75% या तीन महीने के वेतन के समान राशि निकालने की अनुमति से अतिरिक्त फ़ंड नहीं मिलेंगे क्योंकि यह राशि सरकार की नहीं, बल्कि कर्मचारियों की है और उन्हें केवल उनकी राशि निकालने की छूट दी गई है।

“इस पैकेज का दायरा बड़ा है लेकिन निर्धन तबक़े की सहायता करने और अर्थव्यवस्था की गति और धीमी होने से रोकने के लिए यह सक्षम नहीं है। वित्त मंत्री की 1.7 लाख करोड़ रुपए की घोषणा आपात स्थिति के उपायों के लिए ज़रूरी 3.75 लाख करोड़ रुपए की आधी भी नहीं है,” 635 अर्थशास्त्रियों, शिक्षकों और छात्रों की ओर से 26 मार्च के एक प्रेस नोट में कहा गया। यह राशि निर्धन परिवारों को एकमुश्त 7,000 रुपए ट्रांसफर करने की ज़रूरत के आधार पर तय की गई है।

लॉकडाउन और सामाजिक दूरी की आवश्यकता के कारण सरकार की घोषणा में इस बात का विवरण भी नहीं है कि इन उपायों को कैसे लागू किया जाएगा, नोट में कहा गया है।

 

“इन हालात में नक़दी के ट्रांसफ़र की घोषणाएं अपेक्षाकृत कम दिख रही हैं, और हमारा अनुमान है कि लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के असर से वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में जीडीपी की दर में वृद्धि 2.4% और 2020-21 की पहली तिमाही में 0.5% तक सीमित रहेगी,” क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की प्रिंसिपल इकनॉमिस्ट, अदिति नायर ने अनाज देने में वृद्धि और किसानों को लाभ और पेंशन के अग्रिम भुगतान का स्वागत करते हुए ट्विटर पर एक बयान में कहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के तीन दिन बाद इस पैकेज का ऐलान किया गया। लॉकडाउन में सभी ग़ैर-ज़रूरी व्यवसाय बंद होंगे, देश में ट्रेनों की आवाजाही और उड़ानों पर रोक होगी, सार्वजनिक परिवहन सीमित होगा और लोग अपने घरों से नहीं निकल सकेंगे।

यह कदम कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है, जो एक महामारी का रूप ले चुका है। इससे दुनिया भर में 33,968 लोगों की मौत हो चुकी है और 7,00,000 से अधिक लोग प्रभावित हैं, जॉन्स हॉपिकिन्स कोरोनावायरस रिसोर्स सेंटर (30 मार्च तक) के आंकड़ों के अनुसार। भारत में, इस बीमारी से 29 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 1,079 लोग संक्रमित हैं, हेल्थचेक डेटाबेस, कोरोनावायरस मॉनीटर के 30 मार्च, सुबह 10.30 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार।

सार्वजनिक परिवहन के बंद होने के कारण फंसे हुए, बेरोज़गार प्रवासी श्रमिकों के अपने घर ना पहुंच पाने, खाने-पीने की चीज़ों की कमी और आमदनी के नुक़सान की कई रिपोर्ट आई हैं, इनमें ख़ासतौर पर अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े लोग हैं।

अतिरिक्त फ़ंडिंग की कमी

1.7 लाख करोड़ रुपए के पैकेज में प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत हर एक प्रावधान के लिए सरकार ने अतिरिक्त फ़ंड का आवंटन नहीं किया है, इंडियास्पेंड के एक विश्लेषण के अनुसार।

उदाहरण के लिए, एंप्लॉइज़ प्रॉविडेंट फ़ंड स्कीम से औपचारिक क्षेत्र से कर्मचारियों को लाभ के लिए कर्मचारियों की अपनी राशि का ही उपयोग होगा। सरकार ने कहा है कि वह प्रॉविडेंट फ़ंड एकाउंट वाले कर्मचारियों को राशि का 75% या तीन महीने के वेतन के बराबर राशि को निकालने की अनुमति देगी। सामान्य तौर पर, एक फ़ैक्ट्री में तालाबंदी या दो महीने के लिए बंद होने पर कर्मचारी अपने हिस्से की पीएफ़ की राशि का 100% और उनके एक महीने तक बेरोज़गार रहने पर 75% हिस्सा निकाल सकते हैं

यह कर्मचारियों के लिए कोई राहत नहीं है क्योंकि उन्हें अपने सोशल सिक्योरिटी फ़ंड से राशि उधार लेनी होगी। इस में सरकार की ओर से कर्मचारियों को सीधे राहत देने के बजाय उन्हें अपनी लघु अवधि की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दूरदर्शी सोच नहीं रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है; इसके अलावा एंप्लॉई प्रॉविडेंट फ़ंड सब्सिडी में कुछ ही कंपनियां शामिल होंगी और यह एक आंशिक उपाय है; संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में कर्मचारियों को राहत पैकेज से अधिक लाभ नहीं मिलेगा, ज़ेवियर स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट (एक्सएलआरआई), जमशेदपुर में प्रोफ़ेसर के आर श्याम सुंदर ने इंडियास्पेंड को बताया।

सरकार ने यह भी कहा है कि वह तीन महीने के लिए प्रॉविडेंट फ़ंड में कर्मचारियों और नियोक्ता दोनों का योगदान (मूल वेतन का 24%) देगी। लेकिन यह उन्हीं कंपनियों पर लागू होगा जहां सौ से कम कर्मचारी हैं और उनमें से 90% का वेतन 15,000 रुपए महीने से कम है। इससे सभी प्रॉविडेंट फ़ंड एकाउंट होल्डर्स के 16% या देश की वर्कफ़ोर्स के 1.6% लोग ही लाभार्थी होंगे, बिज़नेस स्टैंडर्ड की 27 मार्च की इस रिपोर्ट के अनुसार।

घोषित उपाय

Programmes Announced
Benefit Findings
Provident Fund Withdrawals No additional spending. EPFO rules already allow for withdrawal of up to 75% wages after factory-closure and up to 100% if unemployed for a month.
Provident Fund Payments Covers only 16% of PF account holders
MGNREGS Wage Increase Revised wage lower than average wage being paid by states.
Foodgrain benefits No implementation roadmap given the lockdown
Free cooking gas cylinders No implementation roadmap given the lockdown
District Mineral Foundation No additional spending. Funds to help miners and mining-affected communities being diverted.
Cash transfer to Women with Jan Dhan Accounts Rs 500 given to every woman but the amount is too low to run a household, experts say.
Cash transfer to farmers under the PM Kisan Nidhi No additional spending. Payments are only being advanced.
Assistance to construction workers State governments will utilise Rs 31,000 crore of the construction welfare fund to support 35 million construction sector workers. Includes only registered workers and not every worker is registered.
Cash transfer to the disabled Unclear if benefits are in addition to existing cash transfers
Cash transfer to widows Unclear if benefits are in addition to existing cash transfers

Based on an IndiaSpend analysis of data for different schemes.

इसी तरह, खनन करने वालों और खनन से प्रभावित समुदायों की सहायता के लिए माइनिंग कंपनियों पर लगाए जाने वाले करों से एक फ़ंड, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फ़ाउंडेशन (डीएमएफ़), का इस्तेमाल कोविड-19 के लिए करने का फ़ैसला लिया गया है।

वित्त मंत्रालय के आर्थिक पैकेज की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डीएमएफ़ से सरकार मेडिकल टेस्टिंग, जांच और मरीज़ों के इलाज के लिए सुविधाएं बढ़ाएगी, इसके साथ ही बीमारी को फैलने से रोकने के प्रयासों में इसका इस्तेमाल होगा।

अतिरिक्त अनाज, मुफ़्त गैस सिलेंडर से निर्धन तबक़े को मदद

सरकार ने कहा है कि वह खाद्य सुरक्षा कानून (एफ़एसए) के तहत आने वाले लगभग 80 करोड़ लोगों को मिलने वाले खाद्यान्न को तीन महीने के लिए दोगुना करेगी और हर परिवार को हर महीने एक किलो दाल भी उपलब्ध कराएगी। “खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने और 5 किलो चावल या गेहूं और एक किलो उपयुक्त दाल के प्रावधान की निश्चित तौर पर प्रशंसा की जानी चाहिए और यह करोड़ों परिवारों की सहायता के लिए एक अच्छा उपाय है,” एक्सएलआरआई के श्याम सुंदर ने कहा। 

एफ़एसए के तहत, प्राथमिकता वाले परिवारों (संपत्तियों के स्वामित्व पर आधारित) को प्रति माह 5 किलोग्राम अनाज मिलता है, जबकि अंत्योदय अन्न योजना के लिए पात्र परिवारों को सब्सिडी पर 35 किलोग्राम अनाज सब्सिडी पर दिया जाता है।

इसे सफ़ल बनाने के लिए, ऊपर हमने जिन 635 एक्टिविस्ट्स के बारे में बताया था उन्होंने सुझाव दिया है कि वितरण वाले स्थानों पर अधिक भीड़ से बचने के लिए सरकार को राशन की सप्लाई घर-घर करनी चाहिए। इसके अलावा उनका सुझाव है कि जिन परिवारों के पास अनाज का इस्तेमाल करने के साधन नहीं हैं सरकार को उन्हें दो वक़्त का पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना चाहिए। झारखंड, तमिलनाडु और केरल सहित कुछ राज्यों ने कहा है कि वह उन लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराएंगे जिन्हें इसकी ज़रूरत है।

सरकार ने यह भी कहा है कि वह प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के लाभार्थियों को तीन महीने के लिए हर महीने एक मुफ़्त कुकिंग गैस सिलेंडर देगी। यह योजना 2016 में शुरू हुई थी और इसमें ग़रीबी की रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को कुकिंग गैस सिलेंडर दिए गए थे। हालांकि, यह देखना होगा कि मुफ़्त कुकिंग गैस सिलेंडर के वितरण को कैसे लागू किया जाता है क्योंकि इस योजना में सिलेंडर की सप्लाई में देरी की नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से पहले आलोचना की जा चुकी है।

मनरेगा के मानदेय में 20 रुपए की बढ़ोत्तरी

सरकार ने कहा है कि मनरेगा के तहत श्रमिकों के मानदेय को एक अप्रैल से 182 रुपए से बढ़ाकर 202 रुपए किया जाएगा, यह वृद्धि 20 रुपए की है (200 ग्राम के पारले-जी के बिस्कुट की कीमत के बराबर)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि इससे प्रति परिवार 2,000 रुपए की अतिरिक्त आमदनी होगी।

इस योजना में 2019-20 में 12 करोड़ से अधिक श्रमिक थे जो एक साल में कम से कम 100 दिन के रोज़गार के पात्र थे, एनआरईजीए पोर्टल के अनुसार।

वित्त मंत्री की प्रति परिवार औसतन 2,000 रुपए की अतिरिक्त आमदनी की घोषणा “तथ्यों की ग़लत प्रस्तुति” है, बेंगलुरु की अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर, राजेन्द्र नारायणन ने इंडियास्पेंड को बताया। उन्होंने कहा कि यह घोषणा “वास्तविक भुगतान के औसत पर आधारित है और कानून के अनुसार दिए जाने वाले भुगतान पर नहीं।” भुगतान की दर में महंगाई के आधार पर वार्षिक परिवर्तन किया जाता है और यह वृद्धि भी उस औसत से कम है जो राज्य सरकारें वास्तव में मनरेगा श्रमिकों को देती हैं। 24 मार्च को जारी 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संशोधित भुगतान की दर के आधार पर औसत दर 238.5 रुपए थी, उन्होंने आगे बताया। श्रमिकों को लॉकडाउन के दौरान कोई भुगतान नहीं मिलेगा और यह वृद्धि काम शुरू होने पर ही प्रभावी होगी, उन्होंने कहा।

यह भी साफ़ नहीं है कि सरकार उन सभी को कैसे काम उपलब्ध कराएगी जिन्हें इसकी ज़रूरत है। वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तीन तिमाहियों में 47 लाख लोगों को रोज़गार मिला था, जबकि इसकी मांग लगभग 54 लाख लोगों ने की थी, थिंक टैंक ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के फरवरी में किए गए सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार।

 

इसके अलावा, इस योजना में भुगतान मिलने में लगातार देरी हुई है। 27 जनवरी 2020 तक 91% यानी 2,802.59 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया था, द हिंदू बिज़नेस लाइन की जनवरी 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़। सरकारी आंकड़ों के आधार पर दी गई इस रिपोर्ट में बताया गया था कि दिसंबर 2019 में भुगतान का लगभग 54%, नवंबर 2019 में 32% और अक्टूबर 2019 में 29% बकाया था।

महिलाएं, बुज़ुर्ग, स्वास्थ्य कर्मचारी और किसान

प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत जुलाई में लगभग 14.5 करोड़ किसानों को मिलने वाली 2,000 रुपए की राशि का भुगतान अप्रैल में ही कर दिया जाएगा -- लेकिन यह लगभग 8.7 करोड़ किसानों को ही मिलेगा। इस योजना के तहत सरकार के पास लगभग 9.8 करोड़ किसान पंजीकृत हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि लाभार्थियों की सूची से 1.1 करोड़ किसान क्यों बाहर हैं। 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत, किसानों को एक साल में तीन समान किश्तों में 6,000 रुपए दिए जाने होते हैं।

सरकार ने कहा है कि वह आशा कार्यकर्ताओं समेत स्वास्थ्य सेवा के कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराएगी क्योंकि उन्हें इस महामारी से अधिक ख़तरा है।

जिन महिलाओं का जन धन योजना के तहत बैंक एकाउंट है, ऐसी लगभग 20 करोड़ महिलाओं को अगले तीन महीने के लिए आर्थिक सहायता के तौर पर हर महीने 500 रुपए दिए जाएंगे।

इसके अलावा, विकलांगों और विधवाओं को तीन महीने के दौरान 1,000 रुपए मिलेंगे। सरकार पहले ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 40 साल की उम्र से ज़्यादा की विधवाओं को 300 रुपए महीने देती है और 80 साल की उम्र से ज़्यादा की विधवाओं को 500 रुपए महीना दिए जाते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि 1,000 रुपए इसके अतिरिक्त होंगे या नहीं।

(निधि और उत्सव, इंडियास्पेंड के साथ इंटर्न, और श्रेया राइटर/एडिटर हैं।)

यह रिपोर्ट अंग्रेज़ी में 27 मार्च 2020 को IndiaSpend पर प्रकाशित हुई, जिसका हिंदी के लिए अपडेट के साथ 30 मार्च को अनुवाद किया गया।

हम फ़ीडबैक का स्वागत करते हैं। कृपया respond@indiaspend.org पर लिखें। हम भाषा और व्याकरण की शुद्धता के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

मुंबई/जयपुरः देश में कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन में निर्धन लोगों को राहत देने के लिए आर्थिक पैकेज घोषित किया गया है। लेकिन इस पैकेज में चुनौती के स्तर का अनुमान कम लगाया गया है और यह राहत पर्याप्त नहीं होगी, विशेषज्ञों की राय और इंडियास्पेंड की ओर से सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार।

वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च, 2020 को कहा था कि उसने प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत, 1.7 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की योजना बनाई है। इसमें अतिरिक्त अनाज का वितरण, महिलाओं, किसानों और निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों को सीधे नकद लाभ, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बीमा और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए लाभ शामिल थे। इनमें से बहुत से लाभ फ़ंडिंग में वास्तविक वृद्धि नहीं हैं, जबकि कुछ वर्तमान योजनाओं से ही जुड़े हैं, जैसा कि हमारे विश्लेषण से पता चला है।

हालांकि अधिक अनाज और नकद लाभों से निर्धन तबक़े को मदद मिलेगी, लेकिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत भुगतान में वृद्धि जैसे कुछ लाभ वास्तव में कोई लाभ नहीं हैं -- राज्य सरकारें पहले ही केंद्र सरकार की ओर से घोषित “वृद्धि” से अधिक भुगतान दे रही हैं। कुछ अन्य घोषणाएं, जैसे कर्मचारियों को उनके प्रॉविडेंट फ़ंड (पीएफ़) का 75% या तीन महीने के वेतन के समान राशि निकालने की अनुमति से अतिरिक्त फ़ंड नहीं मिलेंगे क्योंकि यह राशि सरकार की नहीं, बल्कि कर्मचारियों की है और उन्हें केवल उनकी राशि निकालने की छूट दी गई है।

“इस पैकेज का दायरा बड़ा है लेकिन निर्धन तबक़े की सहायता करने और अर्थव्यवस्था की गति और धीमी होने से रोकने के लिए यह सक्षम नहीं है। वित्त मंत्री की 1.7 लाख करोड़ रुपए की घोषणा आपात स्थिति के उपायों के लिए ज़रूरी 3.75 लाख करोड़ रुपए की आधी भी नहीं है,” 635 अर्थशास्त्रियों, शिक्षकों और छात्रों की ओर से 26 मार्च के एक प्रेस नोट में कहा गया। यह राशि निर्धन परिवारों को एकमुश्त 7,000 रुपए ट्रांसफर करने की ज़रूरत के आधार पर तय की गई है।

लॉकडाउन और सामाजिक दूरी की आवश्यकता के कारण सरकार की घोषणा में इस बात का विवरण भी नहीं है कि इन उपायों को कैसे लागू किया जाएगा, नोट में कहा गया है।

 

“इन हालात में नक़दी के ट्रांसफ़र की घोषणाएं अपेक्षाकृत कम दिख रही हैं, और हमारा अनुमान है कि लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के असर से वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में जीडीपी की दर में वृद्धि 2.4% और 2020-21 की पहली तिमाही में 0.5% तक सीमित रहेगी,” क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की प्रिंसिपल इकनॉमिस्ट, अदिति नायर ने अनाज देने में वृद्धि और किसानों को लाभ और पेंशन के अग्रिम भुगतान का स्वागत करते हुए ट्विटर पर एक बयान में कहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के तीन दिन बाद इस पैकेज का ऐलान किया गया। लॉकडाउन में सभी ग़ैर-ज़रूरी व्यवसाय बंद होंगे, देश में ट्रेनों की आवाजाही और उड़ानों पर रोक होगी, सार्वजनिक परिवहन सीमित होगा और लोग अपने घरों से नहीं निकल सकेंगे।

यह कदम कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है, जो एक महामारी का रूप ले चुका है। इससे दुनिया भर में 33,968 लोगों की मौत हो चुकी है और 7,00,000 से अधिक लोग प्रभावित हैं, जॉन्स हॉपिकिन्स कोरोनावायरस रिसोर्स सेंटर (30 मार्च तक) के आंकड़ों के अनुसार। भारत में, इस बीमारी से 29 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 1,079 लोग संक्रमित हैं, हेल्थचेक डेटाबेस, कोरोनावायरस मॉनीटर के 30 मार्च, सुबह 10.30 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार।

सार्वजनिक परिवहन के बंद होने के कारण फंसे हुए, बेरोज़गार प्रवासी श्रमिकों के अपने घर ना पहुंच पाने, खाने-पीने की चीज़ों की कमी और आमदनी के नुक़सान की कई रिपोर्ट आई हैं, इनमें ख़ासतौर पर अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े लोग हैं।

अतिरिक्त फ़ंडिंग की कमी

1.7 लाख करोड़ रुपए के पैकेज में प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत हर एक प्रावधान के लिए सरकार ने अतिरिक्त फ़ंड का आवंटन नहीं किया है, इंडियास्पेंड के एक विश्लेषण के अनुसार।

उदाहरण के लिए, एंप्लॉइज़ प्रॉविडेंट फ़ंड स्कीम से औपचारिक क्षेत्र से कर्मचारियों को लाभ के लिए कर्मचारियों की अपनी राशि का ही उपयोग होगा। सरकार ने कहा है कि वह प्रॉविडेंट फ़ंड एकाउंट वाले कर्मचारियों को राशि का 75% या तीन महीने के वेतन के बराबर राशि को निकालने की अनुमति देगी। सामान्य तौर पर, एक फ़ैक्ट्री में तालाबंदी या दो महीने के लिए बंद होने पर कर्मचारी अपने हिस्से की पीएफ़ की राशि का 100% और उनके एक महीने तक बेरोज़गार रहने पर 75% हिस्सा निकाल सकते हैं

यह कर्मचारियों के लिए कोई राहत नहीं है क्योंकि उन्हें अपने सोशल सिक्योरिटी फ़ंड से राशि उधार लेनी होगी। इस में सरकार की ओर से कर्मचारियों को सीधे राहत देने के बजाय उन्हें अपनी लघु अवधि की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दूरदर्शी सोच नहीं रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है; इसके अलावा एंप्लॉई प्रॉविडेंट फ़ंड सब्सिडी में कुछ ही कंपनियां शामिल होंगी और यह एक आंशिक उपाय है; संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में कर्मचारियों को राहत पैकेज से अधिक लाभ नहीं मिलेगा, ज़ेवियर स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट (एक्सएलआरआई), जमशेदपुर में प्रोफ़ेसर के आर श्याम सुंदर ने इंडियास्पेंड को बताया।

सरकार ने यह भी कहा है कि वह तीन महीने के लिए प्रॉविडेंट फ़ंड में कर्मचारियों और नियोक्ता दोनों का योगदान (मूल वेतन का 24%) देगी। लेकिन यह उन्हीं कंपनियों पर लागू होगा जहां सौ से कम कर्मचारी हैं और उनमें से 90% का वेतन 15,000 रुपए महीने से कम है। इससे सभी प्रॉविडेंट फ़ंड एकाउंट होल्डर्स के 16% या देश की वर्कफ़ोर्स के 1.6% लोग ही लाभार्थी होंगे, बिज़नेस स्टैंडर्ड की 27 मार्च की इस रिपोर्ट के अनुसार।

घोषित उपाय

Programmes Announced
Benefit Findings
Provident Fund Withdrawals No additional spending. EPFO rules already allow for withdrawal of up to 75% wages after factory-closure and up to 100% if unemployed for a month.
Provident Fund Payments Covers only 16% of PF account holders
MGNREGS Wage Increase Revised wage lower than average wage being paid by states.
Foodgrain benefits No implementation roadmap given the lockdown
Free cooking gas cylinders No implementation roadmap given the lockdown
District Mineral Foundation No additional spending. Funds to help miners and mining-affected communities being diverted.
Cash transfer to Women with Jan Dhan Accounts Rs 500 given to every woman but the amount is too low to run a household, experts say.
Cash transfer to farmers under the PM Kisan Nidhi No additional spending. Payments are only being advanced.
Assistance to construction workers State governments will utilise Rs 31,000 crore of the construction welfare fund to support 35 million construction sector workers. Includes only registered workers and not every worker is registered.
Cash transfer to the disabled Unclear if benefits are in addition to existing cash transfers
Cash transfer to widows Unclear if benefits are in addition to existing cash transfers

Based on an IndiaSpend analysis of data for different schemes.

इसी तरह, खनन करने वालों और खनन से प्रभावित समुदायों की सहायता के लिए माइनिंग कंपनियों पर लगाए जाने वाले करों से एक फ़ंड, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फ़ाउंडेशन (डीएमएफ़), का इस्तेमाल कोविड-19 के लिए करने का फ़ैसला लिया गया है।

वित्त मंत्रालय के आर्थिक पैकेज की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डीएमएफ़ से सरकार मेडिकल टेस्टिंग, जांच और मरीज़ों के इलाज के लिए सुविधाएं बढ़ाएगी, इसके साथ ही बीमारी को फैलने से रोकने के प्रयासों में इसका इस्तेमाल होगा।

अतिरिक्त अनाज, मुफ़्त गैस सिलेंडर से निर्धन तबक़े को मदद

सरकार ने कहा है कि वह खाद्य सुरक्षा कानून (एफ़एसए) के तहत आने वाले लगभग 80 करोड़ लोगों को मिलने वाले खाद्यान्न को तीन महीने के लिए दोगुना करेगी और हर परिवार को हर महीने एक किलो दाल भी उपलब्ध कराएगी। “खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने और 5 किलो चावल या गेहूं और एक किलो उपयुक्त दाल के प्रावधान की निश्चित तौर पर प्रशंसा की जानी चाहिए और यह करोड़ों परिवारों की सहायता के लिए एक अच्छा उपाय है,” एक्सएलआरआई के श्याम सुंदर ने कहा। 

एफ़एसए के तहत, प्राथमिकता वाले परिवारों (संपत्तियों के स्वामित्व पर आधारित) को प्रति माह 5 किलोग्राम अनाज मिलता है, जबकि अंत्योदय अन्न योजना के लिए पात्र परिवारों को सब्सिडी पर 35 किलोग्राम अनाज सब्सिडी पर दिया जाता है।

इसे सफ़ल बनाने के लिए, ऊपर हमने जिन 635 एक्टिविस्ट्स के बारे में बताया था उन्होंने सुझाव दिया है कि वितरण वाले स्थानों पर अधिक भीड़ से बचने के लिए सरकार को राशन की सप्लाई घर-घर करनी चाहिए। इसके अलावा उनका सुझाव है कि जिन परिवारों के पास अनाज का इस्तेमाल करने के साधन नहीं हैं सरकार को उन्हें दो वक़्त का पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना चाहिए। झारखंड, तमिलनाडु और केरल सहित कुछ राज्यों ने कहा है कि वह उन लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराएंगे जिन्हें इसकी ज़रूरत है।

सरकार ने यह भी कहा है कि वह प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के लाभार्थियों को तीन महीने के लिए हर महीने एक मुफ़्त कुकिंग गैस सिलेंडर देगी। यह योजना 2016 में शुरू हुई थी और इसमें ग़रीबी की रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को कुकिंग गैस सिलेंडर दिए गए थे। हालांकि, यह देखना होगा कि मुफ़्त कुकिंग गैस सिलेंडर के वितरण को कैसे लागू किया जाता है क्योंकि इस योजना में सिलेंडर की सप्लाई में देरी की नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से पहले आलोचना की जा चुकी है।

मनरेगा के मानदेय में 20 रुपए की बढ़ोत्तरी

सरकार ने कहा है कि मनरेगा के तहत श्रमिकों के मानदेय को एक अप्रैल से 182 रुपए से बढ़ाकर 202 रुपए किया जाएगा, यह वृद्धि 20 रुपए की है (200 ग्राम के पारले-जी के बिस्कुट की कीमत के बराबर)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि इससे प्रति परिवार 2,000 रुपए की अतिरिक्त आमदनी होगी।

इस योजना में 2019-20 में 12 करोड़ से अधिक श्रमिक थे जो एक साल में कम से कम 100 दिन के रोज़गार के पात्र थे, एनआरईजीए पोर्टल के अनुसार।

वित्त मंत्री की प्रति परिवार औसतन 2,000 रुपए की अतिरिक्त आमदनी की घोषणा “तथ्यों की ग़लत प्रस्तुति” है, बेंगलुरु की अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर, राजेन्द्र नारायणन ने इंडियास्पेंड को बताया। उन्होंने कहा कि यह घोषणा “वास्तविक भुगतान के औसत पर आधारित है और कानून के अनुसार दिए जाने वाले भुगतान पर नहीं।” भुगतान की दर में महंगाई के आधार पर वार्षिक परिवर्तन किया जाता है और यह वृद्धि भी उस औसत से कम है जो राज्य सरकारें वास्तव में मनरेगा श्रमिकों को देती हैं। 24 मार्च को जारी 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संशोधित भुगतान की दर के आधार पर औसत दर 238.5 रुपए थी, उन्होंने आगे बताया। श्रमिकों को लॉकडाउन के दौरान कोई भुगतान नहीं मिलेगा और यह वृद्धि काम शुरू होने पर ही प्रभावी होगी, उन्होंने कहा।

यह भी साफ़ नहीं है कि सरकार उन सभी को कैसे काम उपलब्ध कराएगी जिन्हें इसकी ज़रूरत है। वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तीन तिमाहियों में 47 लाख लोगों को रोज़गार मिला था, जबकि इसकी मांग लगभग 54 लाख लोगों ने की थी, थिंक टैंक ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के फरवरी में किए गए सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार।

 

इसके अलावा, इस योजना में भुगतान मिलने में लगातार देरी हुई है। 27 जनवरी 2020 तक 91% यानी 2,802.59 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया था, द हिंदू बिज़नेस लाइन की जनवरी 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़। सरकारी आंकड़ों के आधार पर दी गई इस रिपोर्ट में बताया गया था कि दिसंबर 2019 में भुगतान का लगभग 54%, नवंबर 2019 में 32% और अक्टूबर 2019 में 29% बकाया था।

महिलाएं, बुज़ुर्ग, स्वास्थ्य कर्मचारी और किसान

प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत जुलाई में लगभग 14.5 करोड़ किसानों को मिलने वाली 2,000 रुपए की राशि का भुगतान अप्रैल में ही कर दिया जाएगा -- लेकिन यह लगभग 8.7 करोड़ किसानों को ही मिलेगा। इस योजना के तहत सरकार के पास लगभग 9.8 करोड़ किसान पंजीकृत हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि लाभार्थियों की सूची से 1.1 करोड़ किसान क्यों बाहर हैं। 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत, किसानों को एक साल में तीन समान किश्तों में 6,000 रुपए दिए जाने होते हैं।

सरकार ने कहा है कि वह आशा कार्यकर्ताओं समेत स्वास्थ्य सेवा के कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराएगी क्योंकि उन्हें इस महामारी से अधिक ख़तरा है।

जिन महिलाओं का जन धन योजना के तहत बैंक एकाउंट है, ऐसी लगभग 20 करोड़ महिलाओं को अगले तीन महीने के लिए आर्थिक सहायता के तौर पर हर महीने 500 रुपए दिए जाएंगे।

इसके अलावा, विकलांगों और विधवाओं को तीन महीने के दौरान 1,000 रुपए मिलेंगे। सरकार पहले ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 40 साल की उम्र से ज़्यादा की विधवाओं को 300 रुपए महीने देती है और 80 साल की उम्र से ज़्यादा की विधवाओं को 500 रुपए महीना दिए जाते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि 1,000 रुपए इसके अतिरिक्त होंगे या नहीं।

(निधि और उत्सव, इंडियास्पेंड के साथ इंटर्न, और श्रेया राइटर/एडिटर हैं।)

यह रिपोर्ट अंग्रेज़ी में 27 मार्च 2020 को IndiaSpend पर प्रकाशित हुई, जिसका हिंदी के लिए अपडेट के साथ 30 मार्च को अनुवाद किया गया।

हम फ़ीडबैक का स्वागत करते हैं। कृपया respond@indiaspend.org पर लिखें। हम भाषा और व्याकरण की शुद्धता के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।