यूपी के कस्बों और छोटे शहरों में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन पुलिस के भरोसे: ग्राउंड रिपोर्ट

गोंडा-लखनऊ हाइवे के एक ढाबे पर रुकी बस से उतरकर यात्री नाश्ता करते हुए। फ़ोटोः श्रृंखला पांडेय

लखनऊ: मुझे गोंडा से लखनऊ पहुंचना था। चार जुलाई शाम को करीब 5 बजे मैं रोडवेज़  की एक बस में सवार हो गई। गोंडा बस अड्डे की बजाय यह बस मुझे गोंडा-लखनऊ रोड पर ही मिल गई थी। मैंने हाथ से बस को रुकने का इशारा किया, बस रुक गई। लॉक़ाउन की पाबंदियों में ढील के बाद मैं पहली बार बस में सफ़र करने जा रही थी। मुझे लगा था कि इन दिनों बस का सफ़र, सामान्य दिनों से अलग होगा। मेरे हाथ सैनिटाइज़ कराए जाएंगे, मास्क देखे जाएंगे इसके बाद मुझे कोई सीट दी जाएगी। लेकिन बस में चढ़ते ही मेरा यह भ्रम टूट गया। 

 

बस के अंदर पहले से लगभग ज़्यादातर सीटों पर यात्री बैठे थे, ज़्यादातर बिना मास्क के थे। बस में यात्रियों को बैठाने में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन नहीं किया गया था। रास्ते में जो कोई भी बस को रोकने के लिए हाथ से इशारा करता, बस रुक जाती और बिना कोई सावधानी बरते, नए यात्री बस में चढ़ जाते। टिकट देने आए कंडक्टर के न तो हाथों में दस्ताने था और न ही चेहरे पर मास्क। लगभग डेढ़ घंटे बाद बस एक ढाबे पर रूकती हैं जहां बस के ज्यादातर यात्री उतरकर खाने-पीने में लग जाते हैं। ऐसा लगता ही नहीं था कि देश और दुनिया किसी महामारी से जूझ रही है। लखनऊ तक सफ़र ऐसा ही रहा।

 

इस यात्रा का ज़िक्र करना इसलिए भी ज़रूरी था कि 16 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोनावायरस के दौरान उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के काम की तारीफ़ की थी।

लॉकडाउन की बंदिशों में मिली छूट के बाद इंडियास्पेंड की टीम ने उत्तर प्रदेश के कस्बों और छोटे शहरों का हाल जाना। राज्य सरकार ने बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आवश्यक कर दिया है, इसके उल्लंघन पर जुर्माना और क़ानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। हमारी टीम ने अपनी पड़ताल में जाना कि लखनऊ, ग़ाज़ियाबाद, नोएडा और आगरा जैसे बड़े शहरों में भले ही लोग मास्क लगा रहे हों और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हों, मगर राज्य के कस्बों और छोटे शहरों में इसका पालन नहीं हो पा रहा है। कस्बों और छोटे शहरों में चलने वाली उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसों में निगम की गाइडलाइंस का पालन नहीं हो रहा है। राज्य में लोगों से मास्क लगवाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाना पुलिस के भरोसे है। 

परिवहन निगम की बसों में गाइडलाइंस का पालन नहीं 

लॉकडाउन 4.0 खत्म होने के साथ ही यूपी में सार्वजनिक वाहनों को दोबारा शुरू करने की मंज़ूरी मिल गई थी। इसके लिए परिवहन निगम ने गाइडलांइस भी जारी की थी। इन गाइडलांइस के मुताबिक़ बस को चलाने से पहले पूरी तरह से सैनिटाइज़ किया जाना है। कंडक्टर को मास्क व दस्ताने पहनना ज़रूरी है, हर बस में हैंड सेनेटाइज़र उपलब्ध होगा और सभी यात्रियों के हाथ सैनिटाइज़ कराए जाएंगे। यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान मास्क पहनना अनिवार्य होगा। 

“जहां तक हो सकता है हम इन नियमों का पालन करते हैं लेकिन कई बार ज़्यादा यात्री हो जाने की वजह से सीट के बीच दूरी नहीं रखी जा सकती। मास्क पहनने के लिए यात्रियों से कहा जाता है और ज़्यादातर लोग पहनते भी हैं,” परिवहन निगम की बस में कंडक्टर वरुण ने बताया।

नियमों के बाद भी रोडवेज बस में बैठने वाले यात्रियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीें हो रहा है। फ़ोटोः श्रृंखला पांडेय

जब से राज्य में परिवहन विभाग की बसें चलनी शुरु हुई हैं उनमें यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक जून को इन बसों में लगभग 52 हज़ार यात्रियों ने सफ़र किया। यह संख्या 30 जून को बढ़कर 8.76 लाख हो गई, उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक, राज शेखर ने एक ट्वीट के ज़रिए बताया।

उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम का दावा है कि उसकी बसें सुरक्षित हैं और पूरी सावधानी के साथ संचालित की जा रही हैं। लेकिन गोंडा से लखनऊ तक के सफ़र में इस संवाददाता ने जो देखा वह निगम के दावों के बिल्कुल विपरीत था।

 

कस्बों और छोटे शहरों में सोशल डिस्टेंसिंग के मायने

एक जुलाई से लागू हुए अनलॉक-2 के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गाइडलाइंस जारी की थी। नई गाइडलाइंस के अनुसार, दुकानों में अब सिर्फ 5 लोग ही इकट्ठा हो सकते हैं। इस दौरान भी उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। सभी लोगों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा। 

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोनावायरस के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने 10 जुलाई को एक अधिसूचना जारी की जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने पर लगने वाले जुर्माने को 100 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया, यूपी के स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग के अपर सचिव, अमित मोहन प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसकी जानकारी दी थी। कोई व्यक्ति जितनी बार भी बिना मास्क के पाया जाएगा उतनी ही बार उसे 500 रुपए का जुर्माना भरना होगा।

एक जुलाई से सात जुलाई तक पूरे राज्य में मास्क न पहनने पर 7 लाख 40 हज़ार 508 लोगों से 7 करोड़ 92 लाख 23 हजार 322 रुपए का जुर्माना वसूल किया गया है, न्यूज़18 की इस रिपोर्ट के मुताबिक़।

लगभग 20 करोड़ की आबादी वाले राज्य में इन गाइडलाइंस का पालन करवानी आसान नहीं है। इंडियास्पेंड की टीम ने उत्तर प्रदेश के गोंडा, सीतापुर और रायबरेली ज़िलों के स्थानीय बाज़ारों, सब्ज़ी मंडियों और दुकानों में पाया कि इन नियमों के बावजूद भी लोग मास्क अनिवार्य रूप से नहीं पहन रहे हैं और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। 

सीतापुर ज़िले में एक छोटी सी चाय की दुकान पर करीब 8-10 लोग एक साथ बैठे थे। यहां न किसी ने मास्क पहना था और न ही उनके बीच उचित दूरी थी। ‘’मास्क कोई कब तक पहनेगा और घर से भी कब तक न निकले अब जिसे होना होगा कोरोना हो जाएगा और जिसे मरना होगा वह मर जाएगा। सब ऊपर वाले के हाथ में है,” मास्क न लगाए जाने की वजह पूछने पर रमेश (35) ने कहा।

सीतापुर ज़िले की एक चाय की दुकान। यूपी के कस्बों और छोटे शहरों में कोविड-19 को लेकर जागरुकता का अभाव है। फ़ोटोः श्रृंखला पांडेय

सीतापुर के एक स्थानीय बाज़ार में बाइक पर सवार दो युवकों से जब इस संवाददाता ने मास्क न लगाने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा अपना शहर है यहां पुलिस भी हमें जानती है कोई नहीं रोकेगा। इन बाजारों में लोग बिना मास्क और सोशल डिस्टेसिंग के ऐसे घूमते हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। इंडियास्पेंड टीम ने कपड़े और घरेलू सामान की दुकानों में जाकर भी यही पाया कि किसी भी नियम का गंभीरता से पालन नहीं हो रहा है। 

 

“हम लगातार लोगों से भीड़भाड़ वाली जगह- बाज़ार, बैंक- में जाते समय मास्क लगाने की अपील कर रहे हैं। जो लोग इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ़ कार्रवाई करने का भी आदेश है। पुलिस को जगह-जगह तैनात किया गया है। लॉकडाउन में छूट देने के बाद लापरवाही की शिकायतें लगातार आ भी रही हैं जिन पर अब सख़्ती के आदेश हैं,” सीतापुर के ज़िलाधिकारी अखिलेश तिवारी ने बताया।

 

सीतापुर ज़िले में कोरोनावायरस के 16 जुलाई तक कुल 99 मामले सामने आए हैं जिनमें 61 ठीक हो चुके हैं और एक की मौत हुई है। रायबरेली ज़िले में 16 जुलाई तक कुल 191 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से 138 लोग ठीक हो गए हैं और 4 की मौत हो चुकी है।

 

‘’ज़िले में कोविड को लेकर जागरूकता, नियमों का पालन कैसे कराना है, यह सारी ज़िम्मेदारी चिकित्सा अधिकारी,  सीडीओ (चीफ़ डवेलेपमेंट ऑफ़िसर), एसडीएम और संबंधित अधिकारियों को दी गई है। इसके लिए हम जगह-जगह पुलिस तैनात करके निगरानी रखते हैं कि लोग बिना मास्क के इधर-उधर भीड़ में न दिखें। बड़े चौराहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं जिससे वाहनों पर नज़र रखी जा सके,”  रायबरेली की ज़िलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने बताया।

“ज़िले में मास्क को अनिवार्य कर दिया गया है, लोगों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। निगरानी के लिए जगह-जगह पुलिस तैनात रहती है। नए नियम के बाद दुकानें सिर्फ सोमवार से शुक्रवार तक खुलने का निर्देश दिया गया है,” रायबरेली के सीडीओ, अभिषेक गोयल ने बताया।

 

पूरे प्रदेश में धारा 188 के तहत 16 जुलाई तक 1.12 लाख एफ़आईआर दर्ज की गई हैं जिनमें 2.64 लाख लोगों को नामजद किया गया है। प्रदेश में अब तक नियमों का उल्लंघन करने पर 63,217 वाहन सीज़ किए गए हैं।

ग्रामीण इलाक़ों में कोरोनावायरस को लेकर जागरूकता की ज़िम्मेदारी ग्राम प्रधान, प्रधान सचिव और बीडीओ के पास होती है। लेकिन शहरों में यह ज़िम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी गई है जिनके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

लखनऊ से सीतापुर के रास्ते में पड़ने वाली एक सब्ज़ी मंडी का हाल। यहां आस-पास के छोटे किसान सब्जियां बेचने आते हैं। फ़ोटो: दीपांशु मिश्रा

जागरूकता की कमी

कोविड संक्रमण को रोकने के लिए सोशल मीडिया, टीवी, अखबार के माध्यम से लगातार लोगों से अपील की जा रही है कि ज़रूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें, मास्क पहनें, अपने हाथों को बार-बार सैनिटाइज़ करें या अच्छी तरह से धोते रहें। इन सबके बावजूद कई लोग ऐसे हैं जो मास्क पहनने को आदत में शामिल नहीं कर पा रहे हैं। वह रास्ते में भले ही पुलिस के डर से मास्क लगा लें लेकिन ऑफ़िस या गंतव्य पर पहुंचते ही उसे निकाल कर अलग रख देते हैं। 

संतोष सीतापुर में एक कपड़े की एक दुकान पर काम करते हैं। “हम जब दुकान से घर जाते हैं तो हाथ धो लेते हैं लेकिन जब घर पर होते हैं तब बार-बार हाथ नहीं धोते। मास्क घर से दुकान तक आने में पूरे रास्ते लगाए रहते हैं, उसके बाद उतार देते हैं, गर्मी में पूरे दिन मास्क लगाकर काम करना मुश्किल है, सांस फूलने लगती है,” संतोष ने कहा।

‘’हम लोग तो घर पर ही रहते हैं कहीं आना-जाना ही नहीं होता। बार-बार हाथ तो उन लोगों को धोना है जो बाहर आते-जाते हैं।” सीतापुर की ही रचना सिंह ने बताया।

 

कस्बों और छोटे शहरों में एक बड़ी समस्या पानी की सप्लाई की है। यहां निरंतर पानी की सप्लाई ना होने की वजह से लोग सीमित मात्रा में ही पानी भर पाते हैं। पानी की सप्लाई में कमी की वजह से भी लोग बार-बार हाथ नहीं धो पाते हैं।

“सरकार बार-बार हाथ धोने के लिए तो कह रही है लेकिन पानी कितना आता है यह कोई पूछने नहीें आता। सुबह 2 घंटे और शाम को 2  घंटे किसी दिन अगर सुबह आंख न खुले तो पूरा दिन बिना पानी के गुज़ारना पड़ता है। नहाने और पीने के लिए भी पानी पहले से ड्रम में भर कर रखना पड़ता है और पूरे दिन बचा-बचाकर पानी ख़र्च करते हैं,” रायबरेली के प्रकश चौबे ने कहा। सरकारी नौकरी कर रहे प्रकाश मेरठ के रहने वाले हैं और यहां किराये के घर में रहते हैं।

 

अनलॉक- 2 के बाद से शादियों में कुल 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी गई थी। सीतापुर में 11 जून को हुई एक शादी में लगभग 200 लोग शामिल हुए। ‘’नियम तो 50 का था लेकिन इकलौते लड़के की शादी थी तो बारात में ख़ास-ख़ास लोगों को लेकर ही 65 से 70 लोग हो गए। शादी शहर से बाहर थी, इसलिए चेकिंग का डर नहीं था,’’ इस शादी में शामिल एक मेहमान मनोज कुमार ने बताया।

गोंडा ज़िले के बाजार में बिना मास्क के घूमते लोग। फोटो: सत्यार्थ शुक्ला

मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग पुलिस के भरोसे

इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में लोगों का मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना पुलिस के भरोसे है। वह भी तब जब राज्य में पुलिस बल आवश्यकता से कम है। उत्तर प्रदेश में पुलिस बल की स्वीकृत क्षमता 414,492 है जबकि इनमें से केवल 285,540 पद पर ही तैनाती है बाकी के 128,952 पद ख़ाली हैं, पिछले साल दो जुलाई को लोकसभा में पेश एक आंकड़े के अनुसार।

“चेकिंग के दौरान ज़रा सी नजर हट जाए तो लोग तेजी से निकल जाते हैं। पकड़े जाने पर सिफ़ारिशें लगाते हैं। लोगों की समझ में नहीं आ पा रहा है कि यह नियम उनकी ही सुरक्षा के लिए है,” गोंडा ज़िले में तैनात महिला कांस्टेबल प्रीति उपाध्याय ने बताया।

(श्रृंखला, लखनऊ में स्वतंत्र पत्रकार हैं)

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। कृपया respond@indiaspend.org पर लिखें। हम भाषा और व्याकरण की शुद्धता के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

लखनऊ: मुझे गोंडा से लखनऊ पहुंचना था। चार जुलाई शाम को करीब 5 बजे मैं रोडवेज़  की एक बस में सवार हो गई। गोंडा बस अड्डे की बजाय यह बस मुझे गोंडा-लखनऊ रोड पर ही मिल गई थी। मैंने हाथ से बस को रुकने का इशारा किया, बस रुक गई। लॉक़ाउन की पाबंदियों में ढील के बाद मैं पहली बार बस में सफ़र करने जा रही थी। मुझे लगा था कि इन दिनों बस का सफ़र, सामान्य दिनों से अलग होगा। मेरे हाथ सैनिटाइज़ कराए जाएंगे, मास्क देखे जाएंगे इसके बाद मुझे कोई सीट दी जाएगी। लेकिन बस में चढ़ते ही मेरा यह भ्रम टूट गया। 

 

बस के अंदर पहले से लगभग ज़्यादातर सीटों पर यात्री बैठे थे, ज़्यादातर बिना मास्क के थे। बस में यात्रियों को बैठाने में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन नहीं किया गया था। रास्ते में जो कोई भी बस को रोकने के लिए हाथ से इशारा करता, बस रुक जाती और बिना कोई सावधानी बरते, नए यात्री बस में चढ़ जाते। टिकट देने आए कंडक्टर के न तो हाथों में दस्ताने था और न ही चेहरे पर मास्क। लगभग डेढ़ घंटे बाद बस एक ढाबे पर रूकती हैं जहां बस के ज्यादातर यात्री उतरकर खाने-पीने में लग जाते हैं। ऐसा लगता ही नहीं था कि देश और दुनिया किसी महामारी से जूझ रही है। लखनऊ तक सफ़र ऐसा ही रहा।

 

इस यात्रा का ज़िक्र करना इसलिए भी ज़रूरी था कि 16 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोनावायरस के दौरान उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के काम की तारीफ़ की थी।

लॉकडाउन की बंदिशों में मिली छूट के बाद इंडियास्पेंड की टीम ने उत्तर प्रदेश के कस्बों और छोटे शहरों का हाल जाना। राज्य सरकार ने बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति के लिए मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आवश्यक कर दिया है, इसके उल्लंघन पर जुर्माना और क़ानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। हमारी टीम ने अपनी पड़ताल में जाना कि लखनऊ, ग़ाज़ियाबाद, नोएडा और आगरा जैसे बड़े शहरों में भले ही लोग मास्क लगा रहे हों और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हों, मगर राज्य के कस्बों और छोटे शहरों में इसका पालन नहीं हो पा रहा है। कस्बों और छोटे शहरों में चलने वाली उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसों में निगम की गाइडलाइंस का पालन नहीं हो रहा है। राज्य में लोगों से मास्क लगवाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाना पुलिस के भरोसे है। 

परिवहन निगम की बसों में गाइडलाइंस का पालन नहीं 

लॉकडाउन 4.0 खत्म होने के साथ ही यूपी में सार्वजनिक वाहनों को दोबारा शुरू करने की मंज़ूरी मिल गई थी। इसके लिए परिवहन निगम ने गाइडलांइस भी जारी की थी। इन गाइडलांइस के मुताबिक़ बस को चलाने से पहले पूरी तरह से सैनिटाइज़ किया जाना है। कंडक्टर को मास्क व दस्ताने पहनना ज़रूरी है, हर बस में हैंड सेनेटाइज़र उपलब्ध होगा और सभी यात्रियों के हाथ सैनिटाइज़ कराए जाएंगे। यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान मास्क पहनना अनिवार्य होगा। 

“जहां तक हो सकता है हम इन नियमों का पालन करते हैं लेकिन कई बार ज़्यादा यात्री हो जाने की वजह से सीट के बीच दूरी नहीं रखी जा सकती। मास्क पहनने के लिए यात्रियों से कहा जाता है और ज़्यादातर लोग पहनते भी हैं,” परिवहन निगम की बस में कंडक्टर वरुण ने बताया।

नियमों के बाद भी रोडवेज बस में बैठने वाले यात्रियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीें हो रहा है। फ़ोटोः श्रृंखला पांडेय

जब से राज्य में परिवहन विभाग की बसें चलनी शुरु हुई हैं उनमें यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक जून को इन बसों में लगभग 52 हज़ार यात्रियों ने सफ़र किया। यह संख्या 30 जून को बढ़कर 8.76 लाख हो गई, उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक, राज शेखर ने एक ट्वीट के ज़रिए बताया।

उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम का दावा है कि उसकी बसें सुरक्षित हैं और पूरी सावधानी के साथ संचालित की जा रही हैं। लेकिन गोंडा से लखनऊ तक के सफ़र में इस संवाददाता ने जो देखा वह निगम के दावों के बिल्कुल विपरीत था।

 

कस्बों और छोटे शहरों में सोशल डिस्टेंसिंग के मायने

एक जुलाई से लागू हुए अनलॉक-2 के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गाइडलाइंस जारी की थी। नई गाइडलाइंस के अनुसार, दुकानों में अब सिर्फ 5 लोग ही इकट्ठा हो सकते हैं। इस दौरान भी उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। सभी लोगों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा। 

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोनावायरस के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने 10 जुलाई को एक अधिसूचना जारी की जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने पर लगने वाले जुर्माने को 100 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया, यूपी के स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग के अपर सचिव, अमित मोहन प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसकी जानकारी दी थी। कोई व्यक्ति जितनी बार भी बिना मास्क के पाया जाएगा उतनी ही बार उसे 500 रुपए का जुर्माना भरना होगा।

एक जुलाई से सात जुलाई तक पूरे राज्य में मास्क न पहनने पर 7 लाख 40 हज़ार 508 लोगों से 7 करोड़ 92 लाख 23 हजार 322 रुपए का जुर्माना वसूल किया गया है, न्यूज़18 की इस रिपोर्ट के मुताबिक़।

लगभग 20 करोड़ की आबादी वाले राज्य में इन गाइडलाइंस का पालन करवानी आसान नहीं है। इंडियास्पेंड की टीम ने उत्तर प्रदेश के गोंडा, सीतापुर और रायबरेली ज़िलों के स्थानीय बाज़ारों, सब्ज़ी मंडियों और दुकानों में पाया कि इन नियमों के बावजूद भी लोग मास्क अनिवार्य रूप से नहीं पहन रहे हैं और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। 

सीतापुर ज़िले में एक छोटी सी चाय की दुकान पर करीब 8-10 लोग एक साथ बैठे थे। यहां न किसी ने मास्क पहना था और न ही उनके बीच उचित दूरी थी। ‘’मास्क कोई कब तक पहनेगा और घर से भी कब तक न निकले अब जिसे होना होगा कोरोना हो जाएगा और जिसे मरना होगा वह मर जाएगा। सब ऊपर वाले के हाथ में है,” मास्क न लगाए जाने की वजह पूछने पर रमेश (35) ने कहा।

सीतापुर ज़िले की एक चाय की दुकान। यूपी के कस्बों और छोटे शहरों में कोविड-19 को लेकर जागरुकता का अभाव है। फ़ोटोः श्रृंखला पांडेय

सीतापुर के एक स्थानीय बाज़ार में बाइक पर सवार दो युवकों से जब इस संवाददाता ने मास्क न लगाने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा अपना शहर है यहां पुलिस भी हमें जानती है कोई नहीं रोकेगा। इन बाजारों में लोग बिना मास्क और सोशल डिस्टेसिंग के ऐसे घूमते हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। इंडियास्पेंड टीम ने कपड़े और घरेलू सामान की दुकानों में जाकर भी यही पाया कि किसी भी नियम का गंभीरता से पालन नहीं हो रहा है। 

 

“हम लगातार लोगों से भीड़भाड़ वाली जगह- बाज़ार, बैंक- में जाते समय मास्क लगाने की अपील कर रहे हैं। जो लोग इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ़ कार्रवाई करने का भी आदेश है। पुलिस को जगह-जगह तैनात किया गया है। लॉकडाउन में छूट देने के बाद लापरवाही की शिकायतें लगातार आ भी रही हैं जिन पर अब सख़्ती के आदेश हैं,” सीतापुर के ज़िलाधिकारी अखिलेश तिवारी ने बताया।

 

सीतापुर ज़िले में कोरोनावायरस के 16 जुलाई तक कुल 99 मामले सामने आए हैं जिनमें 61 ठीक हो चुके हैं और एक की मौत हुई है। रायबरेली ज़िले में 16 जुलाई तक कुल 191 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से 138 लोग ठीक हो गए हैं और 4 की मौत हो चुकी है।

 

‘’ज़िले में कोविड को लेकर जागरूकता, नियमों का पालन कैसे कराना है, यह सारी ज़िम्मेदारी चिकित्सा अधिकारी,  सीडीओ (चीफ़ डवेलेपमेंट ऑफ़िसर), एसडीएम और संबंधित अधिकारियों को दी गई है। इसके लिए हम जगह-जगह पुलिस तैनात करके निगरानी रखते हैं कि लोग बिना मास्क के इधर-उधर भीड़ में न दिखें। बड़े चौराहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं जिससे वाहनों पर नज़र रखी जा सके,”  रायबरेली की ज़िलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने बताया।

“ज़िले में मास्क को अनिवार्य कर दिया गया है, लोगों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। निगरानी के लिए जगह-जगह पुलिस तैनात रहती है। नए नियम के बाद दुकानें सिर्फ सोमवार से शुक्रवार तक खुलने का निर्देश दिया गया है,” रायबरेली के सीडीओ, अभिषेक गोयल ने बताया।

 

पूरे प्रदेश में धारा 188 के तहत 16 जुलाई तक 1.12 लाख एफ़आईआर दर्ज की गई हैं जिनमें 2.64 लाख लोगों को नामजद किया गया है। प्रदेश में अब तक नियमों का उल्लंघन करने पर 63,217 वाहन सीज़ किए गए हैं।

ग्रामीण इलाक़ों में कोरोनावायरस को लेकर जागरूकता की ज़िम्मेदारी ग्राम प्रधान, प्रधान सचिव और बीडीओ के पास होती है। लेकिन शहरों में यह ज़िम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी गई है जिनके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

लखनऊ से सीतापुर के रास्ते में पड़ने वाली एक सब्ज़ी मंडी का हाल। यहां आस-पास के छोटे किसान सब्जियां बेचने आते हैं। फ़ोटो: दीपांशु मिश्रा

जागरूकता की कमी

कोविड संक्रमण को रोकने के लिए सोशल मीडिया, टीवी, अखबार के माध्यम से लगातार लोगों से अपील की जा रही है कि ज़रूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें, मास्क पहनें, अपने हाथों को बार-बार सैनिटाइज़ करें या अच्छी तरह से धोते रहें। इन सबके बावजूद कई लोग ऐसे हैं जो मास्क पहनने को आदत में शामिल नहीं कर पा रहे हैं। वह रास्ते में भले ही पुलिस के डर से मास्क लगा लें लेकिन ऑफ़िस या गंतव्य पर पहुंचते ही उसे निकाल कर अलग रख देते हैं। 

संतोष सीतापुर में एक कपड़े की एक दुकान पर काम करते हैं। “हम जब दुकान से घर जाते हैं तो हाथ धो लेते हैं लेकिन जब घर पर होते हैं तब बार-बार हाथ नहीं धोते। मास्क घर से दुकान तक आने में पूरे रास्ते लगाए रहते हैं, उसके बाद उतार देते हैं, गर्मी में पूरे दिन मास्क लगाकर काम करना मुश्किल है, सांस फूलने लगती है,” संतोष ने कहा।

‘’हम लोग तो घर पर ही रहते हैं कहीं आना-जाना ही नहीं होता। बार-बार हाथ तो उन लोगों को धोना है जो बाहर आते-जाते हैं।” सीतापुर की ही रचना सिंह ने बताया।

 

कस्बों और छोटे शहरों में एक बड़ी समस्या पानी की सप्लाई की है। यहां निरंतर पानी की सप्लाई ना होने की वजह से लोग सीमित मात्रा में ही पानी भर पाते हैं। पानी की सप्लाई में कमी की वजह से भी लोग बार-बार हाथ नहीं धो पाते हैं।

“सरकार बार-बार हाथ धोने के लिए तो कह रही है लेकिन पानी कितना आता है यह कोई पूछने नहीें आता। सुबह 2 घंटे और शाम को 2  घंटे किसी दिन अगर सुबह आंख न खुले तो पूरा दिन बिना पानी के गुज़ारना पड़ता है। नहाने और पीने के लिए भी पानी पहले से ड्रम में भर कर रखना पड़ता है और पूरे दिन बचा-बचाकर पानी ख़र्च करते हैं,” रायबरेली के प्रकश चौबे ने कहा। सरकारी नौकरी कर रहे प्रकाश मेरठ के रहने वाले हैं और यहां किराये के घर में रहते हैं।

 

अनलॉक- 2 के बाद से शादियों में कुल 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी गई थी। सीतापुर में 11 जून को हुई एक शादी में लगभग 200 लोग शामिल हुए। ‘’नियम तो 50 का था लेकिन इकलौते लड़के की शादी थी तो बारात में ख़ास-ख़ास लोगों को लेकर ही 65 से 70 लोग हो गए। शादी शहर से बाहर थी, इसलिए चेकिंग का डर नहीं था,’’ इस शादी में शामिल एक मेहमान मनोज कुमार ने बताया।

गोंडा ज़िले के बाजार में बिना मास्क के घूमते लोग। फोटो: सत्यार्थ शुक्ला

मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग पुलिस के भरोसे

इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में लोगों का मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना पुलिस के भरोसे है। वह भी तब जब राज्य में पुलिस बल आवश्यकता से कम है। उत्तर प्रदेश में पुलिस बल की स्वीकृत क्षमता 414,492 है जबकि इनमें से केवल 285,540 पद पर ही तैनाती है बाकी के 128,952 पद ख़ाली हैं, पिछले साल दो जुलाई को लोकसभा में पेश एक आंकड़े के अनुसार।

“चेकिंग के दौरान ज़रा सी नजर हट जाए तो लोग तेजी से निकल जाते हैं। पकड़े जाने पर सिफ़ारिशें लगाते हैं। लोगों की समझ में नहीं आ पा रहा है कि यह नियम उनकी ही सुरक्षा के लिए है,” गोंडा ज़िले में तैनात महिला कांस्टेबल प्रीति उपाध्याय ने बताया।

(श्रृंखला, लखनऊ में स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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