सीतारमण के # बजट 2019 भाषण और जेटली के 2014 के बजट भाषण में समानताएं

मुंबई: नरेंद्र मोदी सरकार के पहले और दूसरे बजट के भाषणों के दौरान व्यापक प्रतिबद्धताएं समान हैं: फोकस भौतिक अवसंरचना, कर धन, और बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों पर रहा है। सामाजिक बुनियादी ढांचे, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और श्रम पर कम समय दिया गया है, जैसा कि बजट भाषणों पर इंडियास्पेंड विश्लेषण से पता चलता है।

2014 में पार्टी के सत्ता में आने पर पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के भाषण के साथ हमने 5 जुलाई, 2019 से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण की तुलना की है। 

जेटली का भाषण 16,489 शब्दों का था और 2 घंटे, 7 मिनट और 42 सेकंड तक चला था। सीतारमण का भाषण 20,223 शब्दों का था और 2 घंटे, 9 मिनट और 13 सेकंड तक चला था। कई जगहों पर, भाषण की गति अलग थी। इसलिए, हमने शब्द-गणना का भी विश्लेषण किया और इसे प्रतिशत में व्यक्त किया।

हमने प्रत्येक विषय पर बोले गए शब्दों के अनुपात की गणना की है। हमने प्रत्येक मुद्दे पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों को उन वर्गों से लिया है, जिनमें भाषण को विभाजित किया गया है, कृषि जैसे मामलों को छोड़कर, जिनके पास 2019 में एक अलग खंड नहीं था।

नीचे बताया गया है कि, केंद्रीय बजट की घोषणा करते हुए दो वित्त मंत्रियों ने अपने समय का उपयोग कैसे किया-

कृषि

निर्मला सीतारमण ने लगभग 3 मिनट या अपने भाषण की शब्द-गणना का 2 फीसदी कृषि पर खर्च किया, जिसमें कृषि उत्पादों की क्षमता पर चर्चा की गई, ताकि ‘सम्बद्ध गतिविधियों’ जैसे कि अक्षय ऊर्जा और लकड़ी और बांस की बिक्री से राजस्व उत्पन्न किया जा सके।

2014 में, अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण के 8 मिनट या बजट भाषण की शब्द-गणना का 7.22 फीसदी कृषि पर खर्च किए थे, जिसमें कृषि उद्योग में तकनीकी रूप से सुधार लाने के लिए सरकार की योजना, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, और लंबे समय तक विस्तार के लिए पर्याप्त कार्यक्रम बनाए जाने और अल्पकालिक कृषि ऋण को रेखांकित किया गया।

सीतारमण ने 16 मिनट या अपने भाषण का 11.31 फीसदी ग्रामीण विकास पर चर्चा में खर्च किए, जिनमें से दो-तिहाई ने पिछले पांच वर्षों में सरकार की योजनाओं की सफलता की पुष्टि करने और भविष्य के लिए वर्तमान सरकार के लक्ष्यों को रेखांकित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने ग्रामीण विकास पर अपने भाषण के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 80,250 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की।

इसकी तुलना में, जेटली ने 3.5 मिनट या अपने भाषण का 2.63 फीसदी ग्रामीण विकास पर खर्च किया था, जिस दौरान पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन, ग्रामीण आवास और पिछड़े क्षेत्र अनुदान कोष पर चर्चा की गई है।

कर, व्यवसाय और वित्त

सीतारमण ने 36.5 मिनट (26.37 फीसदी) करों पर बात की, जबकि जेटली ने 36 मिनट (30 फीसदी) बात की थी।

फरवरी 2019 में पूर्ववर्ती वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पूर्व में घोषित किए गए कर के अलावा,सीतारमण ने प्रतिवर्ष 2 करोड़ रुपये से अधिक आय पर 3 फीसदी अधिभार, और प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये से अधिक आय पर 7 फीसदी अधिभार की घोषणा की। उन्होंने 400 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों का 25 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स बढ़ाया।

करों के अलावा, सीतारमण ने लगभग 20 मिनट या अपने भाषण का 11.15 फीसदी फीसदी, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों सहित व्यापार के लिए सरकार की नीतियों को रेखांकित करने में खर्च किए। इसकी तुलना में, जेटली ने करीब 5 मिनट या अपने भाषण के 10.1 फीसदी बिज़नेस क्लास के कार्यक्रमों का वर्णन करने में खर्च किया।

इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, बैंक पूंजीकरण, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के पूंजीगत व्यय, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (आरईआईटी) जैसे उपकरण और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट), ई-बीज प्लेटफॉर्म (एक व्यापार से व्यापार वाणिज्य मंच), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमइएस), और वित्त नीति के बारे में बात करना शामिल था। 

स्वास्थ्य देखभाल

राज्यों द्वारा व्यय को शामिल करते हुए, भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.4 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च करता है। यह अभी भी 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति द्वारा निर्धारित जीडीपी लक्ष्य के 2.5 फीसदी से बहुत कम है, और यहां तक कि 2010 के जीडीपी के 2 फीसदी के लक्ष्य से भी कम है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अप्रैल 2017 में बताया था। नेपाल अपनी जीडीपी का 2.3 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च करता है, जबकि श्रीलंका 2 फीसदी खर्च करता है, जैसा कि जनवरी 2018 में इंडियास्पेंड ने रिपोर्ट किया था।

सीतारमण के भाषण में 'स्वास्थ्य' शब्द तीन बार दिखाई दिया: पहला, आगामी दशक के लिए सरकार के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए; दूसरा, स्वच्छ भारत अभियान के प्रभाव की प्रशंसा करते हुए; और तीसरा, स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने के लिए व्यक्तियों के लिए कर प्रोत्साहन का वर्णन करते हुए।

जेटली ने 3 मिनट से ज्यादा यानी अपने भाषण का 2.15 फीसदी सरकार के स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों का वर्णन पर खर्च किया था, जिसमें विभिन्न राज्यों में नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्थापित करने के साथ-साथ सरकारी मेडिकल कॉलेज और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान केंद्र भी की स्थापना भी शामिल था।

शिक्षा

सीतारमण ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा पर चर्चा करते हुए (5 मिनट, 4.44 फीसदी) खर्च किया, जबकि 2014 में जेटली ने इस पर 2 मिनट, 1.46 फीसदी खर्च किया था।

सीतारमण का भाषण उच्च शिक्षा और 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम पर केंद्रित था।

उसने भारत में उच्च शिक्षा के एक आयोग के गठन का आह्वान किया, और "विश्व स्तर के संस्थानों" के गठन के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए। उनके भाषण में, अंतरिम बजट में पीयूष गोयल द्वारा घोषित कुल खर्च के हिस्से के रूप में शिक्षा खर्च में कटौती, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 5 फरवरी, 2019 को रिपोर्ट किया था, को संबोधित नहीं किया गया है। 

सर्व शिक्षा अभियान और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम सहित जेटली का भाषण प्राथमिक और मध्य विद्यालय के शिक्षा पर अधिक केंद्रित था।

रिन्युएबल एनर्जी

सीतारमण ने अपने पूरे भाषण में दो बार 'रिन्युएबल' शब्द का उल्लेख किया; इनमें से कोई भी संदर्भ सरकारी कार्यक्रम से संबंधित नहीं था। हरियाली ऊर्जा विकल्पों की ओर, उनकी भाषण का लगभग 2 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए समर्पित था, जिसमें उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कर प्रोत्साहन और सरकारी निवेश पर चर्चा की गई।

जेटली ने एक मिनट के करीब, अपने भाषण का 1.3 फीसदी, पांच राज्यों में अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए रिन्युएबल एनर्जीके बारे में योजनाओं और एक ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के निर्माण की रूपरेखा तैयार करने पर खर्च किया था। उन्होंने अपने भाषण में तीन बार ‘जलवायु परिवर्तन’ और एक बार पर्यावरण ’शब्द का उल्लेख किया गया था।

गंगा का कायाकल्प

2014 से 2019 के बीच, गंगा को लेकर चर्चा विभिन्न दिशा में हुई है।

सीतारमण ने करीब 1 मिनट, अपने भाषण में लगभग 1.08 फीसदी गंगा पर खर्च किया और 2011 में शुरू किए गए स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन का उल्लेख नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने भविष्यवाणी की कि नदी की नौवहन क्षमता विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ,अगले चार वर्षों में कार्गो की आवाजाही चार गुना बढ़ जाएगी।

जेटली ने करीब एक मिनट, अपने भाषण का 1.19 फीसदी गंगा पर खर्च किया, जिसमें उन्होंने नदी और गंगा संरक्षण मिशन पर नेविगेशन परियोजनाओं के लिए अपनी योजनाओं को रेखांकित करते हुए, एक अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) निधि सहित 2,037 करोड़ रुपये का बजट रखा।

शहरी मुद्दे

जेटली ने 4 मिनट अपने भाषण में लगभग, 3.37 फीसदी शहरी मुद्दों पर खर्च किया जिसमें सरकार के शहरी कार्यक्रमों, बढ़े हुए साझा निवेश, कम लागत वाले आवास, झुग्गी विकास, अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफर्मेशन (एएमआरयूटी) और स्मार्ट सिटीज मिशन के लिए एक दृष्टिकोण पेश किया।

सीतारमण ने शहरी मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए करीब उतना ही (3 मिनट, 3.41 फीसदी) खर्च किया है। उन्होंने शहरी आवास योजना की उपलब्धियों के लिए बधाई दी और मेट्रो-लाइनों और उपनगरीय रेलवे सहित सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से परिवहन बुनियादी ढांचे के लिए अधिक निवेश का आह्वान किया। उन्होंने स्मार्ट शहरों या एएमआरयूटी कार्यक्रम का उल्लेख नहीं किया।

पानी

सीतारमण ने 1.5 मिनट, अपने भाषण में 2.02 फीसदी पानी पर खर्च किया, एक मुद्दा जो लगातार सूखे और बढ़ी हुई कमी के सामने महत्वपूर्ण है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने बताया (यहां और यहां पढ़े)। उन्होंने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प के मंत्रालयों को जल शक्ति मंत्रालय में विलय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हर-घर-जल और जल जीवन मिशन 2024 तक भारत में सभी घरों में पानी की पहुंच सुनिश्चित करेगा।

जेटली ने 2014 में पानी पर चर्चा करते हुए 37 सेकेंड, अपने भाषण में 0.42 फीसदी खर्च किया था, जिसमें परियोजनाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का वर्णन किया गया था, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्टों के उपचार, और आर्सनिक आदि से बचाव शामिल था।

(शिकागो विश्वविद्यालय में द्वितीय वर्ष के राजनीति विज्ञान के छात्र मेहता इंडियास्पेंड में इंटर्न हैं।)

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 6 जुलाई 2019 को IndiaSpend.com पर प्रकाशित हुआ है। 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। कृपया respond@indiaspend.org पर लिखें। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

मुंबई: नरेंद्र मोदी सरकार के पहले और दूसरे बजट के भाषणों के दौरान व्यापक प्रतिबद्धताएं समान हैं: फोकस भौतिक अवसंरचना, कर धन, और बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों पर रहा है। सामाजिक बुनियादी ढांचे, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और श्रम पर कम समय दिया गया है, जैसा कि बजट भाषणों पर इंडियास्पेंड विश्लेषण से पता चलता है।

2014 में पार्टी के सत्ता में आने पर पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के भाषण के साथ हमने 5 जुलाई, 2019 से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण की तुलना की है। 

जेटली का भाषण 16,489 शब्दों का था और 2 घंटे, 7 मिनट और 42 सेकंड तक चला था। सीतारमण का भाषण 20,223 शब्दों का था और 2 घंटे, 9 मिनट और 13 सेकंड तक चला था। कई जगहों पर, भाषण की गति अलग थी। इसलिए, हमने शब्द-गणना का भी विश्लेषण किया और इसे प्रतिशत में व्यक्त किया।

हमने प्रत्येक विषय पर बोले गए शब्दों के अनुपात की गणना की है। हमने प्रत्येक मुद्दे पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों को उन वर्गों से लिया है, जिनमें भाषण को विभाजित किया गया है, कृषि जैसे मामलों को छोड़कर, जिनके पास 2019 में एक अलग खंड नहीं था।

नीचे बताया गया है कि, केंद्रीय बजट की घोषणा करते हुए दो वित्त मंत्रियों ने अपने समय का उपयोग कैसे किया-

कृषि

निर्मला सीतारमण ने लगभग 3 मिनट या अपने भाषण की शब्द-गणना का 2 फीसदी कृषि पर खर्च किया, जिसमें कृषि उत्पादों की क्षमता पर चर्चा की गई, ताकि ‘सम्बद्ध गतिविधियों’ जैसे कि अक्षय ऊर्जा और लकड़ी और बांस की बिक्री से राजस्व उत्पन्न किया जा सके।

2014 में, अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण के 8 मिनट या बजट भाषण की शब्द-गणना का 7.22 फीसदी कृषि पर खर्च किए थे, जिसमें कृषि उद्योग में तकनीकी रूप से सुधार लाने के लिए सरकार की योजना, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, और लंबे समय तक विस्तार के लिए पर्याप्त कार्यक्रम बनाए जाने और अल्पकालिक कृषि ऋण को रेखांकित किया गया।

सीतारमण ने 16 मिनट या अपने भाषण का 11.31 फीसदी ग्रामीण विकास पर चर्चा में खर्च किए, जिनमें से दो-तिहाई ने पिछले पांच वर्षों में सरकार की योजनाओं की सफलता की पुष्टि करने और भविष्य के लिए वर्तमान सरकार के लक्ष्यों को रेखांकित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने ग्रामीण विकास पर अपने भाषण के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 80,250 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की।

इसकी तुलना में, जेटली ने 3.5 मिनट या अपने भाषण का 2.63 फीसदी ग्रामीण विकास पर खर्च किया था, जिस दौरान पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन, ग्रामीण आवास और पिछड़े क्षेत्र अनुदान कोष पर चर्चा की गई है।

कर, व्यवसाय और वित्त

सीतारमण ने 36.5 मिनट (26.37 फीसदी) करों पर बात की, जबकि जेटली ने 36 मिनट (30 फीसदी) बात की थी।

फरवरी 2019 में पूर्ववर्ती वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पूर्व में घोषित किए गए कर के अलावा,सीतारमण ने प्रतिवर्ष 2 करोड़ रुपये से अधिक आय पर 3 फीसदी अधिभार, और प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये से अधिक आय पर 7 फीसदी अधिभार की घोषणा की। उन्होंने 400 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों का 25 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स बढ़ाया।

करों के अलावा, सीतारमण ने लगभग 20 मिनट या अपने भाषण का 11.15 फीसदी फीसदी, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों सहित व्यापार के लिए सरकार की नीतियों को रेखांकित करने में खर्च किए। इसकी तुलना में, जेटली ने करीब 5 मिनट या अपने भाषण के 10.1 फीसदी बिज़नेस क्लास के कार्यक्रमों का वर्णन करने में खर्च किया।

इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, बैंक पूंजीकरण, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के पूंजीगत व्यय, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (आरईआईटी) जैसे उपकरण और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट), ई-बीज प्लेटफॉर्म (एक व्यापार से व्यापार वाणिज्य मंच), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमइएस), और वित्त नीति के बारे में बात करना शामिल था। 

स्वास्थ्य देखभाल

राज्यों द्वारा व्यय को शामिल करते हुए, भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.4 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च करता है। यह अभी भी 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति द्वारा निर्धारित जीडीपी लक्ष्य के 2.5 फीसदी से बहुत कम है, और यहां तक कि 2010 के जीडीपी के 2 फीसदी के लक्ष्य से भी कम है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने अप्रैल 2017 में बताया था। नेपाल अपनी जीडीपी का 2.3 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च करता है, जबकि श्रीलंका 2 फीसदी खर्च करता है, जैसा कि जनवरी 2018 में इंडियास्पेंड ने रिपोर्ट किया था।

सीतारमण के भाषण में 'स्वास्थ्य' शब्द तीन बार दिखाई दिया: पहला, आगामी दशक के लिए सरकार के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए; दूसरा, स्वच्छ भारत अभियान के प्रभाव की प्रशंसा करते हुए; और तीसरा, स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने के लिए व्यक्तियों के लिए कर प्रोत्साहन का वर्णन करते हुए।

जेटली ने 3 मिनट से ज्यादा यानी अपने भाषण का 2.15 फीसदी सरकार के स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों का वर्णन पर खर्च किया था, जिसमें विभिन्न राज्यों में नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्थापित करने के साथ-साथ सरकारी मेडिकल कॉलेज और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान केंद्र भी की स्थापना भी शामिल था।

शिक्षा

सीतारमण ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा पर चर्चा करते हुए (5 मिनट, 4.44 फीसदी) खर्च किया, जबकि 2014 में जेटली ने इस पर 2 मिनट, 1.46 फीसदी खर्च किया था।

सीतारमण का भाषण उच्च शिक्षा और 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम पर केंद्रित था।

उसने भारत में उच्च शिक्षा के एक आयोग के गठन का आह्वान किया, और "विश्व स्तर के संस्थानों" के गठन के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए। उनके भाषण में, अंतरिम बजट में पीयूष गोयल द्वारा घोषित कुल खर्च के हिस्से के रूप में शिक्षा खर्च में कटौती, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 5 फरवरी, 2019 को रिपोर्ट किया था, को संबोधित नहीं किया गया है। 

सर्व शिक्षा अभियान और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम सहित जेटली का भाषण प्राथमिक और मध्य विद्यालय के शिक्षा पर अधिक केंद्रित था।

रिन्युएबल एनर्जी

सीतारमण ने अपने पूरे भाषण में दो बार 'रिन्युएबल' शब्द का उल्लेख किया; इनमें से कोई भी संदर्भ सरकारी कार्यक्रम से संबंधित नहीं था। हरियाली ऊर्जा विकल्पों की ओर, उनकी भाषण का लगभग 2 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए समर्पित था, जिसमें उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कर प्रोत्साहन और सरकारी निवेश पर चर्चा की गई।

जेटली ने एक मिनट के करीब, अपने भाषण का 1.3 फीसदी, पांच राज्यों में अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए रिन्युएबल एनर्जीके बारे में योजनाओं और एक ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के निर्माण की रूपरेखा तैयार करने पर खर्च किया था। उन्होंने अपने भाषण में तीन बार ‘जलवायु परिवर्तन’ और एक बार पर्यावरण ’शब्द का उल्लेख किया गया था।

गंगा का कायाकल्प

2014 से 2019 के बीच, गंगा को लेकर चर्चा विभिन्न दिशा में हुई है।

सीतारमण ने करीब 1 मिनट, अपने भाषण में लगभग 1.08 फीसदी गंगा पर खर्च किया और 2011 में शुरू किए गए स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन का उल्लेख नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने भविष्यवाणी की कि नदी की नौवहन क्षमता विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ,अगले चार वर्षों में कार्गो की आवाजाही चार गुना बढ़ जाएगी।

जेटली ने करीब एक मिनट, अपने भाषण का 1.19 फीसदी गंगा पर खर्च किया, जिसमें उन्होंने नदी और गंगा संरक्षण मिशन पर नेविगेशन परियोजनाओं के लिए अपनी योजनाओं को रेखांकित करते हुए, एक अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) निधि सहित 2,037 करोड़ रुपये का बजट रखा।

शहरी मुद्दे

जेटली ने 4 मिनट अपने भाषण में लगभग, 3.37 फीसदी शहरी मुद्दों पर खर्च किया जिसमें सरकार के शहरी कार्यक्रमों, बढ़े हुए साझा निवेश, कम लागत वाले आवास, झुग्गी विकास, अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफर्मेशन (एएमआरयूटी) और स्मार्ट सिटीज मिशन के लिए एक दृष्टिकोण पेश किया।

सीतारमण ने शहरी मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए करीब उतना ही (3 मिनट, 3.41 फीसदी) खर्च किया है। उन्होंने शहरी आवास योजना की उपलब्धियों के लिए बधाई दी और मेट्रो-लाइनों और उपनगरीय रेलवे सहित सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से परिवहन बुनियादी ढांचे के लिए अधिक निवेश का आह्वान किया। उन्होंने स्मार्ट शहरों या एएमआरयूटी कार्यक्रम का उल्लेख नहीं किया।

पानी

सीतारमण ने 1.5 मिनट, अपने भाषण में 2.02 फीसदी पानी पर खर्च किया, एक मुद्दा जो लगातार सूखे और बढ़ी हुई कमी के सामने महत्वपूर्ण है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने बताया (यहां और यहां पढ़े)। उन्होंने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प के मंत्रालयों को जल शक्ति मंत्रालय में विलय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हर-घर-जल और जल जीवन मिशन 2024 तक भारत में सभी घरों में पानी की पहुंच सुनिश्चित करेगा।

जेटली ने 2014 में पानी पर चर्चा करते हुए 37 सेकेंड, अपने भाषण में 0.42 फीसदी खर्च किया था, जिसमें परियोजनाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का वर्णन किया गया था, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्टों के उपचार, और आर्सनिक आदि से बचाव शामिल था।

(शिकागो विश्वविद्यालय में द्वितीय वर्ष के राजनीति विज्ञान के छात्र मेहता इंडियास्पेंड में इंटर्न हैं।)

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 6 जुलाई 2019 को IndiaSpend.com पर प्रकाशित हुआ है। 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। कृपया respond@indiaspend.org पर लिखें। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।