भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पिछले तीन दशकों के आंकड़े बताते हैं कि कच्छ में लगातार गर्मी और बारिश के दिनों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे मछुआरों और किसानों की आजीविका खतरे में पड़ी है।