भारतीय साइबर सुरक्षा कंपनी TraceX Labs ने फिशिंग और मैलवेयर खतरों का पता लगाने के लिए AI आधारित SaaS सॉफ्टवेयर विकसित किया
TraceX Labs ने AI आधारित SaaS साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जिनमें URL X एंटरप्राइज सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म और TraceX Guard मोबाइल सुरक्षा एप्लिकेशन शामिल हैं, जो फिशिंग, मैलवेयर और ऑनलाइन धोखाधड़ी का पता लगाने में मदद करते हैं।

TraceX Labs
डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ साइबर हमलों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। फिशिंग, मैलवेयर, ऑनलाइन धोखाधड़ी और दुर्भावनापूर्ण वेब लिंक जैसे साइबर खतरे अब व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं से लेकर बड़े संगठनों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक को प्रभावित कर रहे हैं। इसी बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए भारतीय साइबर सुरक्षा कंपनी TraceX Labs ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सॉफ्टवेयर-एज़-ए-सर्विस (SaaS) सुरक्षा प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जिनका उद्देश्य डिजिटल खतरों का रियल-टाइम में पता लगाना और उन्हें रोकना है।
कंपनी का प्रमुख एंटरप्राइज समाधान URL X है, जो संदिग्ध और दुर्भावनापूर्ण वेब लिंक का विश्लेषण करने के लिए डिजाइन किया गया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईमेल, मैसेजिंग एप्लिकेशन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों के माध्यम से भेजे जाने वाले फिशिंग लिंक साइबर हमलों का सबसे आम माध्यम बन चुके हैं। ऐसे लिंक उपयोगकर्ताओं को नकली वेबसाइटों पर ले जाकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग क्रेडेंशियल या अन्य संवेदनशील डेटा चुराने का प्रयास करते हैं।
URL X प्लेटफॉर्म वेब लिंक को खोलने से पहले ही उसका रियल-टाइम विश्लेषण करता है। यह डोमेन व्यवहार, होस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, रीडायरेक्ट पैटर्न और अन्य तकनीकी संकेतकों का अध्ययन करके यह निर्धारित करता है कि कोई लिंक सुरक्षित है या संभावित रूप से खतरनाक। यह प्रणाली विशेष रूप से एंटरप्राइज संगठनों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां कर्मचारियों द्वारा गलती से किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पूरे नेटवर्क की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
एंटरप्राइज समाधान के अलावा कंपनी ने मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए भी एक सुरक्षा एप्लिकेशन विकसित किया है, जिसे TraceX Guard कहा जाता है। यह एंड्रॉयड आधारित मोबाइल सुरक्षा एप्लिकेशन स्मार्टफोन में इंस्टॉल किए गए एप्स, वेब लिंक और QR कोड को स्कैन करके संभावित खतरों की पहचान करता है। यह मैलवेयर, स्पाइवेयर, रैनसमवेयर और फिशिंग प्रयासों जैसे जोखिमों को पहचानने में मदद करता है और उपयोगकर्ताओं को समय रहते चेतावनी देता है।
आज के समय में स्मार्टफोन का उपयोग बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और दैनिक संचार के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। ऐसे में मोबाइल डिवाइस साइबर अपराधियों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बन गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल सुरक्षा समाधान और रियल-टाइम थ्रेट मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म डिजिटल सुरक्षा रणनीतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।
साइबर सुरक्षा क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल इकोसिस्टम का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे AI आधारित साइबर सुरक्षा तकनीकों की मांग भी बढ़ेगी। रियल-टाइम डेटा विश्लेषण, व्यवहार आधारित खतरा पहचान और क्लाउड-आधारित सुरक्षा सेवाएं भविष्य में संगठनों को उभरते साइबर खतरों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
डिजिटल परिवर्तन के इस दौर में, ऐसे SaaS आधारित सुरक्षा प्लेटफॉर्म संगठनों और उपयोगकर्ताओं दोनों को अपने डिजिटल वातावरण को सुरक्षित बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं।
