रोहिंग्या शरणार्थियों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ तो मिल जाता है, लेकिन अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो माध्यमिक और ऊपर के स्वास्थ्य सुविधाओं के लाभ के लिए अक्सर उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है और इसके लिए वे कर्ज लेने पर मजबूर होते हैं