करोरोनावायरस: सरकार का व्यापक फैलाव से इंकार, विशेषज्ञों ने कहा परीक्षण नाकाफ़ी

नई दिल्ली: दिल्ली के द्वारका की हसीबुल निशा (35) को छह दिन से सूखी खांसी, सर्दी और बुख़ार है। उनके परिवार को चिंता है कि कहीं यह कोरोनावायरस तो नहीं, जिससे दुनिया भर के 200,000 से ज़्यादा लोग संक्रमित हैं और 8,000 से ज़्यादा की मौत हो चुकी है और अब यह धीरे-धीरे भारत में फैल रहा है। उन्होंने कहा कि वह परीक्षण के लिए मोती बाग़ में तीन निजी अस्पतालों टेस्ट के लिए गए, लेकिन उन्हें वापस भेज दिया गया।

निशा की बेटी, ज़़रीना शेख, को कोरोनावायरस से संबंधित सभी सलाह और अपडेट की जानकारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता ​​है कि उनकी मां में भी इसी तरह के लक्षण हैं। "डॉक्टर मेरी मां को पेरासिटामोल की गोलियां देते रहते हैं ... अस्पतालों में बहुत में भीड़ थी और डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से जांच [COVID-19 के लिए] नहीं की जाएगी," ज़रीनाा ने बताया। 

ना तो निशा ने हाल-फ़िलहाल किसी प्रभावित देश की यात्रा की है और ना ही वह किसी भी COVID-19 से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आई है इसलिए वह मुफ्त परीक्षण के लिए योग्य नहीं है। अगर निशा COVID-19 से संक्रमित है, तो इसका मतलब संक्रमण का सामुदायिक फैलाव हो सकता है, जिसका कोई सबूत नहीं है, भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने 19 मार्च को किए गए दावे के अनुसार।

केवल उन्हीं व्यक्तियों का, जिनमें इसके लक्षण हों जैसे खांसी, बुख़ार और सांस की तकलीफ़, COVID-19 के दिशानिर्देशों के तहत परीक्षण हो सकता है, अगर वह इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करते हैं: उन्होंने किसी प्रभावित देश की यात्रा की हो और/या संक्रमित व्यक्ति से संपर्क हुआ हो।

अब तक, भारत में 12,426 लोगों का परीक्षण हुआ है- हर दस लाख लोगों पर लगभग 9.2 परीक्षण। जबकि इटली 18 मार्च 2020 तक 165,541 लोगों का परीक्षण कर चुका है यानी हर दस लाख लोगों पर 2,740.75 परीक्षण। दक्षिण कोरिया, जो 0.9% की कम मृत्यु दर के साथ इसके फैलाव पर क़ाबू पाने में सक्षम रहा है, ने 18 मार्च तक 295,647 परीक्षण किए यानी हर दस लाख लोगों पर 5,729.6 परीक्षण। यहां हर रोज़ 20,000 लोगों का मुफ़्त परीक्षण किया जा रहा है। ब्रिटेन में हर रोज़ लगभग 1,500 लोगों का परीक्षण किया जा रहा है- यानी हर दस लाख लोगों पर 846.7 परीक्षण और यह संख्या 10,000 तक पहुंचाने की योजना है। 

"टेस्ट, टेस्ट, टेस्ट" यह संदेश विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने 16 मार्च, 2020 को सभी देशों को दिया। 

"हमें और टेस्ट करने की ज़रूरत है, टेस्ट के लिए अभी बहुत ही सीमित मानदंड हैं ... और यह संख्या [टेस्ट की] बहुत कम है,” अनंत भान, पुणे स्थित अंतरष्ट्रिय स्वास्थ और स्वास्थ नीति शोधकर्ता ने कहा।

20 मार्च, 2020 को सुबह 10 बजे तक, देश में कोरोनावायरस के 195 मामले सामने आ चुके थे, जिनमें 163 भारतीय और 32 विदेशी हैं। अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 20 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। [हमारे COVID-19 के ट्रैकर को यहां देखें।]

सीमित परीक्षण मानदंड

कोई भी देश जहां यह संक्रमण दूसरे देश से आने वालों के ज़रिए आ रहा है वह पहले चरण में है। दूसरा चरण संक्रमण का स्थानीय फैलाव है, जिसमें दूसरे देश से आने वाले संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोग इसका शिकार हो जाते हैं। तीसरे चरण में, सामुदायिक फैलाव होता है यानी कोई व्यक्ति दूसरे देश से आए किसी अन्य संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना भी संक्रमित हो जाता है। चौथा चरण महामारी का है यानी जब बीमारी अपेक्षा से कहीं ज़्यादा फैल जाए। अगर यह दुनिया भर में फैल जाता है, तो इसे विश्वव्यापी महामारी कहा जाता है, जो कि अब कोरोनावायरस है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अस्पतालों में भर्ती 826 ऐसे मरीज़ों का परीक्षण किया जो गंभीर तीव्र श्वास संक्रमण (SARI)/इन्फ़्लूएंज़ा जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। परीक्षण का मक़सद यह पता लगाना था कि यह वायरस कहीं ऐसे लोगों में तो नहीं फैल रहा जिन्होंने हाल ही में ना तो किसी प्रभावित देश की यात्रा की हो और ना ही किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों।

सभी परीक्षण नकारात्मक थे, ICMR ने 19 मार्च को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा। 18 मार्च, 2020 को ICMR ने कहा था कि नकारात्मक मामलों से पता चलता है कि COVID-19 भारत में सामुदायिक फैलाव के चरण तक नहीं पहुंचा है। जिसकी वजह से भारत को अधिक व्यापक परीक्षण की आवश्यकता नहीं है, सरकार का ऐसा मानना है।

"826 मामले वास्तव में सामुदायिक फैलाव का पता लगाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं," सोनीपत के अशोका विश्वविद्यालय में भौतिकी और जीव विज्ञान के प्रोफेसर गौतम मेनन ने कहा। "हमें वास्तव में लोगों के रैंडम परीक्षण करने की आवश्यकता है जिनमें COVID-19 के आम लक्षण नज़र आते हों, सिर्फ़ चरम लक्षण नहीं, क्योंकि इससे आम तौर पर केवल मरीज़ों के एक बहुत छोटे हिस्से के बारे में पता चलेगा।"

भारत जैसे बड़े देश के लिए, आईसीएमआर का दायरा बहुत छोटा है, मुंबई के जसलोक अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ ओम श्रीवास्तव ने कहा।

दक्षिण कोरिया, जहां 10 मार्च, 2020 तक कुल 8,652 मामले थे, ने भारत की तुलना में हर दस लाख लोगों पर 5,729.59 परीक्षण किए थे। ताइवान ने 100 पुष्ट मामलों के साथ, 18,812 परीक्षण किए। 

"जहां तक ​​स्थानीय फैलाव [स्टेज-दो] के परीक्षण की बात है, हम काफी कुछ कर रहे हैं," आईसीएमआर में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के प्रमुख आर गंगाखेड़कर ने 16 मार्च, 2020 को बताया। हम बड़े पैमाने पर परीक्षण के स्टेज  तक नहीं पहुंचे हैं।

"आज तक, हमारे संयुक्त प्रयासों की वजह से, कोई सामुदायिक फैलाव नहीं है क्योंकि हम मामलों को सत्यापित करने में सक्षम हैं," 19 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा।  "जब सामुदायिक फैलाव शुरू होता है, तो यह कहना मुश्किल हो जाता है कि मरीज़ को संक्रमण कहां से हुआ, जो अब तक ऐसा नहीं है ... आप आसानी से कह सकते हैं कि भारत में कोई सामुदायिक फैलाव नहीं है।"

यह संभव नहीं है कि हम आने वाले हर मामले को ट्रैक करने में कामयाब रहे हैं और यह संभव है कि यह बीमारी लोगों में फैल रही हो और हमे इसका पता इसलिए भी ना चला हो क्योंकि इनमें से अधिकांश मामलों का पता लगना अभी बाकी है, मेनन ने कहा।

दूसरे और तीसरे चरण के मामले में “आपके देश की स्थिति क्या है इसका पता लगाने के लिए आपको ज़्यादा टेस्ट करने होंगे, कम नहीं,” श्रीवास्तव ने सहमति जताते हुए कहा।

आईसीएमआर ज़्यादा सतर्क है। “आईसीएमआर केवल परीक्षण करने की कोशिश कर रहा है, जिसे हमने नकारात्मक पाया है। हम इस वक़्त सामुदायिक फैलाव के बारे में और कुछ नहीं कह सकते। हम और परीक्षण करने और सैंपल साइज़ बढ़ाने की कोशिक कर रहे हैं ताकि और बेहतर परिणाम हासिल हों,” आईसीएमआर के रीज़नल मेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक रजनी कांत ने 19 मार्च को इंडियास्पेंड को बताया।

आईसीएमआर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बिना कोई और विवरण दिए कहा कि निगरानी को बढ़ाया जा रहा है। ख़ासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां COVID19 के मामले सामने आए हैं।

परीक्षण किट

आईसीएमआर ने इस बात की जानकारी नहीं दी कि उनके पास कितने परीक्षण किट उपलब्ध हैं। यदि दक्षिण कोरिया के स्तर पर परीक्षण किया जाता है, जिसने संक्रमण के फैलाव को हर दस लाख लोगों पर 5,729.59 परीक्षण करके रोक दिया है, तो भारत को 77 लाख किट की ज़रूरत होगी, हमारी गणना के अनुसार। 

फ़िलहाल, भारत के पास आवश्यक परीक्षण करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, आईसीएमआर के गंगाखेड़कर ने कहा, और "जर्मनी से दस लाख" और आयात कर रहे हैं।

लेकिन मेनन ने कहा कि और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है, क्योंकि सरकार ने कोई विवरण साझा नहीं किया है।

बहुत कम परीक्षण किए जा रहे हैं

18 मार्च, 2020 तक भारत में लगभग 72 सरकारी प्रयोगशालाएं COVID-19 का परीक्षण कर रही थीं, जिनकी क्षमता 9,000 जांच प्रतिदिन की है, आइसीएमआर के लोकेश शर्मा ने बताया। साथ ही सरकार ने दिल्ली और भुबनेश्वर में दो नए जांच केंद्र खोले हैं जिनकी क्षमता 1,400 जांच प्रतिदिन की है, जिससे भारत की क्षमता एक दिन में 11,800 जांच करने की हो गयी है। आइसीएमआर के अनुसार 49 और प्रयोगशालाएं इस सप्ताह के अंत तक परीक्षण शुरू कर सकती हैंं।

इसके अलावा, आईसीएमआर उन मरीज़ों के रैंडम सैंपल ले रहा है जो इन्फ़्लूएंज़ा या गंभीर तीव्र श्वास संक्रमण (SARI) जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने बताया।

"परीक्षण केवल दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा, हम लोगों में कोई अनावश्यक घबराहट नहीं चाहते हैं,” 16 मार्च की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अग्रवाल ने कहा।

लेकिन परीक्षण की कमी से यह डर पैदा कर सकता है, जैसा कि निशा और उसके परिवार के मामले में हुआ। हमने जिन और चार परिवारों से हमने बात की, वह भी परीक्षण कराना चाहते थे क्योंकि उनका मानना ​​था कि उनके अंदर इसके लक्षण हैं।

”यदि मामलों और मौतों की संख्या बढ़ती रही तो यह केवल उस दहशत को बढ़ाएगा जो हम पहले से ही देखना शुरु कर चुके हैं और यह डरावना है। परीक्षण नहीं कर रहे हैं क्योंकि आप दहशत नहीं फैलाना चाहते हैं, इस बात की कोई तुक समझ नहीं आती है,” स्वास्थ्य विशेषज्ञ भान ने इंडियास्पेंड से कहा। “हमें परीक्षण की अपनी रणनीति में अधिक महत्वाकांक्षी और आक्रामक होना चाहिए।"

"यदि मैं एक डॉक्टर हूं और मेरे पास एक मरीज़ है जो यात्रा या प्रत्यक्ष संपर्क के परीक्षण मानदंडों में फ़िट नहीं है, तो डॉक्टर होने के नाते मुझे इस बात का अधिकार होना चाहिए कि मैं परीक्षण के लिए अनुरोध कर सकूं क्योंकि मुझे COVID-19 संक्रमण का संदेह है," भान ने कहा, "हम इस संभावना को ख़ारिज नहीं कर सकते हैं कि यह [सामुदायिक फैलाव] नहीं हो सकता है," लेकिन भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहने की ज़रूरत है।

जिन तीन जगहों पर निशा ने परीक्षण की कोशिश की उनमें से एक दिल्ली का चरक पालिका अस्पताल है। वहां के चिकित्सा अधिकारी सपन वर्मा ने भान की भावना को दोहराया। "एक डॉक्टर के फ़ैसले पर ज़्यादा भरोसा किया जाना चाहिए, हमें एक परीक्षण के लिए रोगियों की सिफ़ारिश करने में सक्षम होना चाहिए, यह स्थिति को नियंत्रित करने में मदद करेगा।" वह उन डॉक्टरों में से नहीं थे, जिनसे निशा ने सम्पर्क किया था।

अस्पताल में वायरल बुख़ार के रोगियों के लिए एक अलग वार्ड है। "बहुत सारे मरीज़ हैं जो बहुत चिंतित हैं और सोचते हैं कि उन्हें वायरस है", वर्मा ने कहा, "अगर वह किसी प्रभावित देश से आए हैं तो  हम उन्हें केवल राम मनोहर लोहिया [अस्पताल] के लिए रेफ़र कर सकते हैं, अभी तक हम किसी भी मरीज़ को रेफ़र नहीं कर पाए हैं। ”

बिना लक्षण वाले मामलों में चूक हुई

दूसरे देशों के उदाहरण से पता चलता है कि बिना लक्षण वाले मरीज़ जो वायरस के साथ खुलेआम घूमते रहते हैं, उनका पता लगाना सबसे मुश्किल है और उनसे संक्रमण फैलने का बड़ा ख़तरा होता है। सामुदायिक फैलाव का पता लगाने का जो तरीक़ा फ़िलहाल है उससे उनका पता लगाना असंभव है, विशेषज्ञों ने इंडियास्पेंड को बताया।

"यहां तक ​​कि अगर किसी मरीज़ में लक्षण नहीं हैं, तो भी वह वायरस को फैला सकता है, इसलिए हमें इसे ध्यान में रखना होगा। यदि हमारे परीक्षण नंबर बाकी दुनिया के अनुरूप नहीं हैं तो हमें बेहतर करने की ज़रूरत है,” श्रीवास्तव ने कहा।

निजी क्षेत्र की भागीदारी

परीक्षण की क्षमता को बढ़ाने के लिए, भारत सरकार ने कहा है कि वह कुछ चुनिंदा निजी प्रयोगशालाओं को परीक्षण शुरू करने की इजाज़त देगी। केवल उन दिशानिर्देशों के आधार पर जो किसी प्रभावित देश से आए हैं या फिर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं।

निजी परीक्षण में चुनौतियों में से एक संपर्कों को ट्रैक करना है, आईसीएमआर के वैज्ञानिक गंगाखेडकर ने कहा।

एक दूसरी समस्या क़ीमत की है - परीक्षण की क़ीमत लगभग 5,000 रुपए है लेकिन फ़िलहाल यह सभी के लिए मुफ़्त है। आईसीएमआर ने निजी डायग्नोस्टिक ​​सुविधाओं और अस्पतालों को मुफ़्त में परीक्षण करने को कहा है।

"क्या वह [निजी प्रयोगशाला] मुफ्त में कर रहे हैं, यह एक और सवाल है, अगर नहीं तो क्या सरकार इसकी क़ीमत तय करने के लिए तैयार है?" भान ने कहा।

17 मार्च,2020 को आईसीएमआर ने किसी भी कंपनी का नाम लिए बिना  कहा कि वह उच्च गुणवत्ता वाली निजी प्रयोगशालाओं के साथ बातचीत कर रहा है।

सामाजिक अलगाव और शटडाउन

दुनिया भर के देशों ने संक्रमण फैलने रोकने की कोशिश में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया है, जिसका असर 102 देशों के लगभग 85 करोड़ से अधिक बच्चों और युवाओं पर पड़ा है, जबकि 11 देशों ने स्थानीय स्तर पर स्कूल बंद किए हैं। यूनेस्को के ग्लोबल मॉनीटर के अनुसार।

भारत में भी, सरकारी सलाह के बाद सभी शैक्षणिक संस्थान, जिम, सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र, पूल और सिनेमाघर 18 मार्च से 31 मार्च, 2020 तक बंद कर दिए गए हैं। सरकार ने सलाह दी है कि सभी सामूहिक समारोहों और अनावश्यक यात्रा से बचा जाए और सामाजिक अलगाव की सिफारिश की है।  

कुछ अपवादों को छोड़कर, 65 साल से अधिक और 10 साल से कम उम्र के सभी नागरिकों को घर में रहने की सलाह दी गई है, सभी रियायती रेल और हवाई यात्राओं को निलंबित कर दिया गया है, और स्कूल और कॉलेज की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं, 19 मार्च, 2020 की इस  प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार। सरकार ने कहा है कि वह 22 मार्च, 2020 से एक सप्ताह के लिए भारत में किसी भी अंतर्राष्ट्रीय यात्री जहाज़ों को नहीं उतरने देगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि सभी निजी कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें।

फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे कईं देशों में पूरी तरह से लॉकडाउन है, केवल आवश्यक आवागमन की ही अनुमति है।  

(साधिका  इंडियास्पेंड के साथ प्रिंसीपल कॉरोसपोंडेंट हैं।)

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नई दिल्ली: दिल्ली के द्वारका की हसीबुल निशा (35) को छह दिन से सूखी खांसी, सर्दी और बुख़ार है। उनके परिवार को चिंता है कि कहीं यह कोरोनावायरस तो नहीं, जिससे दुनिया भर के 200,000 से ज़्यादा लोग संक्रमित हैं और 8,000 से ज़्यादा की मौत हो चुकी है और अब यह धीरे-धीरे भारत में फैल रहा है। उन्होंने कहा कि वह परीक्षण के लिए मोती बाग़ में तीन निजी अस्पतालों टेस्ट के लिए गए, लेकिन उन्हें वापस भेज दिया गया।

निशा की बेटी, ज़़रीना शेख, को कोरोनावायरस से संबंधित सभी सलाह और अपडेट की जानकारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता ​​है कि उनकी मां में भी इसी तरह के लक्षण हैं। "डॉक्टर मेरी मां को पेरासिटामोल की गोलियां देते रहते हैं ... अस्पतालों में बहुत में भीड़ थी और डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से जांच [COVID-19 के लिए] नहीं की जाएगी," ज़रीनाा ने बताया। 

ना तो निशा ने हाल-फ़िलहाल किसी प्रभावित देश की यात्रा की है और ना ही वह किसी भी COVID-19 से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आई है इसलिए वह मुफ्त परीक्षण के लिए योग्य नहीं है। अगर निशा COVID-19 से संक्रमित है, तो इसका मतलब संक्रमण का सामुदायिक फैलाव हो सकता है, जिसका कोई सबूत नहीं है, भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने 19 मार्च को किए गए दावे के अनुसार।

केवल उन्हीं व्यक्तियों का, जिनमें इसके लक्षण हों जैसे खांसी, बुख़ार और सांस की तकलीफ़, COVID-19 के दिशानिर्देशों के तहत परीक्षण हो सकता है, अगर वह इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करते हैं: उन्होंने किसी प्रभावित देश की यात्रा की हो और/या संक्रमित व्यक्ति से संपर्क हुआ हो।

अब तक, भारत में 12,426 लोगों का परीक्षण हुआ है- हर दस लाख लोगों पर लगभग 9.2 परीक्षण। जबकि इटली 18 मार्च 2020 तक 165,541 लोगों का परीक्षण कर चुका है यानी हर दस लाख लोगों पर 2,740.75 परीक्षण। दक्षिण कोरिया, जो 0.9% की कम मृत्यु दर के साथ इसके फैलाव पर क़ाबू पाने में सक्षम रहा है, ने 18 मार्च तक 295,647 परीक्षण किए यानी हर दस लाख लोगों पर 5,729.6 परीक्षण। यहां हर रोज़ 20,000 लोगों का मुफ़्त परीक्षण किया जा रहा है। ब्रिटेन में हर रोज़ लगभग 1,500 लोगों का परीक्षण किया जा रहा है- यानी हर दस लाख लोगों पर 846.7 परीक्षण और यह संख्या 10,000 तक पहुंचाने की योजना है। 

"टेस्ट, टेस्ट, टेस्ट" यह संदेश विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने 16 मार्च, 2020 को सभी देशों को दिया। 

"हमें और टेस्ट करने की ज़रूरत है, टेस्ट के लिए अभी बहुत ही सीमित मानदंड हैं ... और यह संख्या [टेस्ट की] बहुत कम है,” अनंत भान, पुणे स्थित अंतरष्ट्रिय स्वास्थ और स्वास्थ नीति शोधकर्ता ने कहा।

20 मार्च, 2020 को सुबह 10 बजे तक, देश में कोरोनावायरस के 195 मामले सामने आ चुके थे, जिनमें 163 भारतीय और 32 विदेशी हैं। अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 20 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। [हमारे COVID-19 के ट्रैकर को यहां देखें।]

सीमित परीक्षण मानदंड

कोई भी देश जहां यह संक्रमण दूसरे देश से आने वालों के ज़रिए आ रहा है वह पहले चरण में है। दूसरा चरण संक्रमण का स्थानीय फैलाव है, जिसमें दूसरे देश से आने वाले संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोग इसका शिकार हो जाते हैं। तीसरे चरण में, सामुदायिक फैलाव होता है यानी कोई व्यक्ति दूसरे देश से आए किसी अन्य संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना भी संक्रमित हो जाता है। चौथा चरण महामारी का है यानी जब बीमारी अपेक्षा से कहीं ज़्यादा फैल जाए। अगर यह दुनिया भर में फैल जाता है, तो इसे विश्वव्यापी महामारी कहा जाता है, जो कि अब कोरोनावायरस है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अस्पतालों में भर्ती 826 ऐसे मरीज़ों का परीक्षण किया जो गंभीर तीव्र श्वास संक्रमण (SARI)/इन्फ़्लूएंज़ा जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। परीक्षण का मक़सद यह पता लगाना था कि यह वायरस कहीं ऐसे लोगों में तो नहीं फैल रहा जिन्होंने हाल ही में ना तो किसी प्रभावित देश की यात्रा की हो और ना ही किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों।

सभी परीक्षण नकारात्मक थे, ICMR ने 19 मार्च को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा। 18 मार्च, 2020 को ICMR ने कहा था कि नकारात्मक मामलों से पता चलता है कि COVID-19 भारत में सामुदायिक फैलाव के चरण तक नहीं पहुंचा है। जिसकी वजह से भारत को अधिक व्यापक परीक्षण की आवश्यकता नहीं है, सरकार का ऐसा मानना है।

"826 मामले वास्तव में सामुदायिक फैलाव का पता लगाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं," सोनीपत के अशोका विश्वविद्यालय में भौतिकी और जीव विज्ञान के प्रोफेसर गौतम मेनन ने कहा। "हमें वास्तव में लोगों के रैंडम परीक्षण करने की आवश्यकता है जिनमें COVID-19 के आम लक्षण नज़र आते हों, सिर्फ़ चरम लक्षण नहीं, क्योंकि इससे आम तौर पर केवल मरीज़ों के एक बहुत छोटे हिस्से के बारे में पता चलेगा।"

भारत जैसे बड़े देश के लिए, आईसीएमआर का दायरा बहुत छोटा है, मुंबई के जसलोक अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ ओम श्रीवास्तव ने कहा।

दक्षिण कोरिया, जहां 10 मार्च, 2020 तक कुल 8,652 मामले थे, ने भारत की तुलना में हर दस लाख लोगों पर 5,729.59 परीक्षण किए थे। ताइवान ने 100 पुष्ट मामलों के साथ, 18,812 परीक्षण किए। 

"जहां तक ​​स्थानीय फैलाव [स्टेज-दो] के परीक्षण की बात है, हम काफी कुछ कर रहे हैं," आईसीएमआर में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के प्रमुख आर गंगाखेड़कर ने 16 मार्च, 2020 को बताया। हम बड़े पैमाने पर परीक्षण के स्टेज  तक नहीं पहुंचे हैं।

"आज तक, हमारे संयुक्त प्रयासों की वजह से, कोई सामुदायिक फैलाव नहीं है क्योंकि हम मामलों को सत्यापित करने में सक्षम हैं," 19 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा।  "जब सामुदायिक फैलाव शुरू होता है, तो यह कहना मुश्किल हो जाता है कि मरीज़ को संक्रमण कहां से हुआ, जो अब तक ऐसा नहीं है ... आप आसानी से कह सकते हैं कि भारत में कोई सामुदायिक फैलाव नहीं है।"

यह संभव नहीं है कि हम आने वाले हर मामले को ट्रैक करने में कामयाब रहे हैं और यह संभव है कि यह बीमारी लोगों में फैल रही हो और हमे इसका पता इसलिए भी ना चला हो क्योंकि इनमें से अधिकांश मामलों का पता लगना अभी बाकी है, मेनन ने कहा।

दूसरे और तीसरे चरण के मामले में “आपके देश की स्थिति क्या है इसका पता लगाने के लिए आपको ज़्यादा टेस्ट करने होंगे, कम नहीं,” श्रीवास्तव ने सहमति जताते हुए कहा।

आईसीएमआर ज़्यादा सतर्क है। “आईसीएमआर केवल परीक्षण करने की कोशिश कर रहा है, जिसे हमने नकारात्मक पाया है। हम इस वक़्त सामुदायिक फैलाव के बारे में और कुछ नहीं कह सकते। हम और परीक्षण करने और सैंपल साइज़ बढ़ाने की कोशिक कर रहे हैं ताकि और बेहतर परिणाम हासिल हों,” आईसीएमआर के रीज़नल मेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक रजनी कांत ने 19 मार्च को इंडियास्पेंड को बताया।

आईसीएमआर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बिना कोई और विवरण दिए कहा कि निगरानी को बढ़ाया जा रहा है। ख़ासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां COVID19 के मामले सामने आए हैं।

परीक्षण किट

आईसीएमआर ने इस बात की जानकारी नहीं दी कि उनके पास कितने परीक्षण किट उपलब्ध हैं। यदि दक्षिण कोरिया के स्तर पर परीक्षण किया जाता है, जिसने संक्रमण के फैलाव को हर दस लाख लोगों पर 5,729.59 परीक्षण करके रोक दिया है, तो भारत को 77 लाख किट की ज़रूरत होगी, हमारी गणना के अनुसार। 

फ़िलहाल, भारत के पास आवश्यक परीक्षण करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, आईसीएमआर के गंगाखेड़कर ने कहा, और "जर्मनी से दस लाख" और आयात कर रहे हैं।

लेकिन मेनन ने कहा कि और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है, क्योंकि सरकार ने कोई विवरण साझा नहीं किया है।

बहुत कम परीक्षण किए जा रहे हैं

18 मार्च, 2020 तक भारत में लगभग 72 सरकारी प्रयोगशालाएं COVID-19 का परीक्षण कर रही थीं, जिनकी क्षमता 9,000 जांच प्रतिदिन की है, आइसीएमआर के लोकेश शर्मा ने बताया। साथ ही सरकार ने दिल्ली और भुबनेश्वर में दो नए जांच केंद्र खोले हैं जिनकी क्षमता 1,400 जांच प्रतिदिन की है, जिससे भारत की क्षमता एक दिन में 11,800 जांच करने की हो गयी है। आइसीएमआर के अनुसार 49 और प्रयोगशालाएं इस सप्ताह के अंत तक परीक्षण शुरू कर सकती हैंं।

इसके अलावा, आईसीएमआर उन मरीज़ों के रैंडम सैंपल ले रहा है जो इन्फ़्लूएंज़ा या गंभीर तीव्र श्वास संक्रमण (SARI) जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने बताया।

"परीक्षण केवल दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा, हम लोगों में कोई अनावश्यक घबराहट नहीं चाहते हैं,” 16 मार्च की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अग्रवाल ने कहा।

लेकिन परीक्षण की कमी से यह डर पैदा कर सकता है, जैसा कि निशा और उसके परिवार के मामले में हुआ। हमने जिन और चार परिवारों से हमने बात की, वह भी परीक्षण कराना चाहते थे क्योंकि उनका मानना ​​था कि उनके अंदर इसके लक्षण हैं।

”यदि मामलों और मौतों की संख्या बढ़ती रही तो यह केवल उस दहशत को बढ़ाएगा जो हम पहले से ही देखना शुरु कर चुके हैं और यह डरावना है। परीक्षण नहीं कर रहे हैं क्योंकि आप दहशत नहीं फैलाना चाहते हैं, इस बात की कोई तुक समझ नहीं आती है,” स्वास्थ्य विशेषज्ञ भान ने इंडियास्पेंड से कहा। “हमें परीक्षण की अपनी रणनीति में अधिक महत्वाकांक्षी और आक्रामक होना चाहिए।"

"यदि मैं एक डॉक्टर हूं और मेरे पास एक मरीज़ है जो यात्रा या प्रत्यक्ष संपर्क के परीक्षण मानदंडों में फ़िट नहीं है, तो डॉक्टर होने के नाते मुझे इस बात का अधिकार होना चाहिए कि मैं परीक्षण के लिए अनुरोध कर सकूं क्योंकि मुझे COVID-19 संक्रमण का संदेह है," भान ने कहा, "हम इस संभावना को ख़ारिज नहीं कर सकते हैं कि यह [सामुदायिक फैलाव] नहीं हो सकता है," लेकिन भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहने की ज़रूरत है।

जिन तीन जगहों पर निशा ने परीक्षण की कोशिश की उनमें से एक दिल्ली का चरक पालिका अस्पताल है। वहां के चिकित्सा अधिकारी सपन वर्मा ने भान की भावना को दोहराया। "एक डॉक्टर के फ़ैसले पर ज़्यादा भरोसा किया जाना चाहिए, हमें एक परीक्षण के लिए रोगियों की सिफ़ारिश करने में सक्षम होना चाहिए, यह स्थिति को नियंत्रित करने में मदद करेगा।" वह उन डॉक्टरों में से नहीं थे, जिनसे निशा ने सम्पर्क किया था।

अस्पताल में वायरल बुख़ार के रोगियों के लिए एक अलग वार्ड है। "बहुत सारे मरीज़ हैं जो बहुत चिंतित हैं और सोचते हैं कि उन्हें वायरस है", वर्मा ने कहा, "अगर वह किसी प्रभावित देश से आए हैं तो  हम उन्हें केवल राम मनोहर लोहिया [अस्पताल] के लिए रेफ़र कर सकते हैं, अभी तक हम किसी भी मरीज़ को रेफ़र नहीं कर पाए हैं। ”

बिना लक्षण वाले मामलों में चूक हुई

दूसरे देशों के उदाहरण से पता चलता है कि बिना लक्षण वाले मरीज़ जो वायरस के साथ खुलेआम घूमते रहते हैं, उनका पता लगाना सबसे मुश्किल है और उनसे संक्रमण फैलने का बड़ा ख़तरा होता है। सामुदायिक फैलाव का पता लगाने का जो तरीक़ा फ़िलहाल है उससे उनका पता लगाना असंभव है, विशेषज्ञों ने इंडियास्पेंड को बताया।

"यहां तक ​​कि अगर किसी मरीज़ में लक्षण नहीं हैं, तो भी वह वायरस को फैला सकता है, इसलिए हमें इसे ध्यान में रखना होगा। यदि हमारे परीक्षण नंबर बाकी दुनिया के अनुरूप नहीं हैं तो हमें बेहतर करने की ज़रूरत है,” श्रीवास्तव ने कहा।

निजी क्षेत्र की भागीदारी

परीक्षण की क्षमता को बढ़ाने के लिए, भारत सरकार ने कहा है कि वह कुछ चुनिंदा निजी प्रयोगशालाओं को परीक्षण शुरू करने की इजाज़त देगी। केवल उन दिशानिर्देशों के आधार पर जो किसी प्रभावित देश से आए हैं या फिर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं।

निजी परीक्षण में चुनौतियों में से एक संपर्कों को ट्रैक करना है, आईसीएमआर के वैज्ञानिक गंगाखेडकर ने कहा।

एक दूसरी समस्या क़ीमत की है - परीक्षण की क़ीमत लगभग 5,000 रुपए है लेकिन फ़िलहाल यह सभी के लिए मुफ़्त है। आईसीएमआर ने निजी डायग्नोस्टिक ​​सुविधाओं और अस्पतालों को मुफ़्त में परीक्षण करने को कहा है।

"क्या वह [निजी प्रयोगशाला] मुफ्त में कर रहे हैं, यह एक और सवाल है, अगर नहीं तो क्या सरकार इसकी क़ीमत तय करने के लिए तैयार है?" भान ने कहा।

17 मार्च,2020 को आईसीएमआर ने किसी भी कंपनी का नाम लिए बिना  कहा कि वह उच्च गुणवत्ता वाली निजी प्रयोगशालाओं के साथ बातचीत कर रहा है।

सामाजिक अलगाव और शटडाउन

दुनिया भर के देशों ने संक्रमण फैलने रोकने की कोशिश में स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया है, जिसका असर 102 देशों के लगभग 85 करोड़ से अधिक बच्चों और युवाओं पर पड़ा है, जबकि 11 देशों ने स्थानीय स्तर पर स्कूल बंद किए हैं। यूनेस्को के ग्लोबल मॉनीटर के अनुसार।

भारत में भी, सरकारी सलाह के बाद सभी शैक्षणिक संस्थान, जिम, सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र, पूल और सिनेमाघर 18 मार्च से 31 मार्च, 2020 तक बंद कर दिए गए हैं। सरकार ने सलाह दी है कि सभी सामूहिक समारोहों और अनावश्यक यात्रा से बचा जाए और सामाजिक अलगाव की सिफारिश की है।  

कुछ अपवादों को छोड़कर, 65 साल से अधिक और 10 साल से कम उम्र के सभी नागरिकों को घर में रहने की सलाह दी गई है, सभी रियायती रेल और हवाई यात्राओं को निलंबित कर दिया गया है, और स्कूल और कॉलेज की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं, 19 मार्च, 2020 की इस  प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार। सरकार ने कहा है कि वह 22 मार्च, 2020 से एक सप्ताह के लिए भारत में किसी भी अंतर्राष्ट्रीय यात्री जहाज़ों को नहीं उतरने देगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि सभी निजी कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें।

फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे कईं देशों में पूरी तरह से लॉकडाउन है, केवल आवश्यक आवागमन की ही अनुमति है।  

(साधिका  इंडियास्पेंड के साथ प्रिंसीपल कॉरोसपोंडेंट हैं।)

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