मुस्लिम महिलाओं की आबादी 6.9 फीसदी, लोकसभा में हिस्सेदारी 0.7 फीसदी

  नूंह (हरियाणा), नई दिल्ली, मुंबई: वह अपने गांव की मुखिया हो सकती हैं, लेकिन 22 सदस्यों के अपने बड़े परिवार के लिए रोटियां बनाना अभी भी उनकी पहली जिम्मेदारी है।   हरियाणा के नूंह जिले के हुसैनपुर गांव में अपने घर में छोटे से मिट्टी के चूल्हे पर झुकी आंखें, सलीके से आटे के … Continued

वोट देने वाली महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी, लेकिन महिला उम्मीदवारों की संख्या कम

  नई दिल्ली: यह समझने के लिए कि अप्रैल और मई 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले कुछ राजनीतिक दलों ने अधिक से अधिक महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता के संबंध में सोचा है, आपको केवल सहस्राब्दी के महिला मतदाताओं पर एक नजर डालनी है।   उत्तर-पश्चिमी ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के … Continued

आश्रय स्थलों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार राष्ट्रव्यापी संकट का चेहरा

  नई दिल्ली: उसके पास बचपन की कोई याद नहीं है। उसे पता नहीं कि उसके जैविक माता-पिता कौन हैं औऱ उसे ये भी याद नहीं कि तीन साल की उम्र में वो अपने माता-पिता से कैसे और क्यों अलग हो गई थी। उसे वह दिन याद है, जब वह दक्षिण दिल्ली में लड़कियों के … Continued

भारतीय महिलाएं, मातृत्व और पेनल्टी

  दिल्ली / गुड़गांव: गुड़गांव के एक होटल के कॉन्फ्रेंस रूम में दो विशाल झूमर के नीचे, खूबसूरत कपड़े पहने हुई 250  महिलाएं जोर से ड्रम बजा रही हैं। तेज, धीमी गति से, जोर से, और फिर विराम। यह देखने से आसान सा लगता है। ईशारा मिलने पर एक साथ सीटी बजाते और एकजुट होकर … Continued

एकल महिलाएं हर हाल में क्यों करना चाहती हैं काम?

  नई दिल्ली: कोलकाता की रहने वाली 36 वर्षीय रुचिता काजरिया की शादी नहीं हुई है। वह याद करते हुए बताती हैं कि उन्हें हमेशा से लगता था कि उन्हें नौकरी करनी होगी। उनकी दो बड़ी बहनों ने स्कूल समाप्त होने के बाद ही नौकरी करना शुरु कर दिया था। वह कहती हैं, “मेरे पिता … Continued

हरियाणा में स्कूटर पर दौड़ रही है महिलाओं की उम्मीद

मधुबन में हरियाणा पुलिस अकादमी में, ज्यादातर महिला ट्रेनी कांस्टेबल कहीं भी आने-जाने, यहां तक कि काम पर जाने के लिए अपने पतियों पर निर्भर करती हैं। हेड कांस्टेबल पिंकी उनकी इस आदत को बदलना चाहती हैं। कहती है, “मैं चाहती हूं कि ये लड़कियां ड्राइव करना सीखें, जिससे कहीं आने-जाने के लिए उन्हें किसी … Continued

दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों की महिलाओं को कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए परिवहन पर करना पड़ता है ज्यादा खर्च

मोमीना (बीच में) आंखों से देख नहीं पाती है। वह एक कारखाने में पर्स के धागे काटने के काम के लिए एक साझा रिक्शा लेती है। सप्ताह में छह दिन, और दिन में आठ घंटे काम करने के बदले उनको प्रति माह 5,500 रुपए मिलते हैं। भारत के महानगरों में, महिलाएं छोटी दूरी की यात्रा … Continued